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Auto Sales: ऑटोमोबाइल की खुदरा बिक्री मई में बढ़ी, लेकिन अभी भी धीमी है रफ्तार, फाडा की रिपोर्ट
Mon, 06 Jun 2022 06:28 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Mon, 06 Jun 2022 06:28 PM IST
सार
ऑटोमोबाइल की खुदरा बिक्री थोक डिस्पैच के अनुरूप पिछले महीने तिगुनी हो गई। मई 2021 में महामारी की दूसरी लहर के प्रकोप के कारण वाहन उद्योग में कामकाज बाधित हो गया था।
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Automobile Sector Cars
- फोटो : PTI
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विस्तार
ऑटोमोबाइल की खुदरा बिक्री थोक डिस्पैच के अनुरूप पिछले महीने तिगुनी हो गई। मई 2021 में महामारी की दूसरी लहर के प्रकोप के कारण वाहन उद्योग में कामकाज बाधित हो गया था।
वाहन उद्योग के संगठन फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले महीने 16,46,773 वाहनों की बिक्री हुई, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 5,36,795 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। हालांकि, कोविड से पहले के मई 2019 के महीने की तुलना में बिक्री लगभग 10 प्रतिशत कम थी।
भारत में वाहन निर्माता कारखानों से थोक डिस्पैच के आंकड़े देते हैं, लेकिन ग्राहकों को की गई खुदरा बिक्री की जानकारी नहीं देते। इसलिए रजिस्ट्रेशन की संख्या को प्रॉक्सी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
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FADA के अध्यक्ष विंकेश गुलाटी ने बताया कि मई 2020 और मई 2021 में खुदरा बिक्री के रूप में कम आधार पर, पिछले महीने श्रेणियों में पंजीकरण बढ़ा, जो महामारी की पहली और दूसरी लहर के कारण कम था। उन्होंने कहा, "मई 2022 के दौरान भारतीय ऑटो उद्योग ने लगातार तीसरे महीने अपने प्रदर्शन को जारी रखा। जबकि मई 2021 के साथ YoY की तुलना सभी श्रेणियों में असाधारण रूप से स्वस्थ विकास दर को दर्शाती है, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि मई 2021 और मई 2020 दोनों कोविड के कारण राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन से प्रभावित थे। इसलिए बेहतर तुलना मई 2019 से होगी जो कि एक सामान्य प्री-कोविड महीना था।"
खुदरा बिक्री मई 2021 में 86,479 यूनिट्स और मई 2020 में 31,951 यूनिट्स थी। मई 2019 की तुलना में यात्री वाहनों और ट्रैक्टरों की खुदरा बिक्री में 11.40 प्रतिशत (263,152 यूनिट्स तक) और 33.09 प्रतिशत (52,487 यूनिट्स तक) की बढ़ोतरी हुई। दोपहिया, तिपहिया और वाणिज्यिक वाहनों के पंजीकरण अभी तक ग्रीन जोन में नहीं आए हैं। क्योंकि इन श्रेणियों में क्रमश: -13.91% (12,22,994 इकाइयों तक), -19.32% (41,508 इकाइयों तक) और -11.44% (66,632 इकाइयों तक) की गिरावट आई है।
गुलाटी ने कहा कि ईंधन पर उत्पाद शुल्क कम करने के सरकार के कदम से मुद्रास्फीति पर काबू पाने और वाहनों की बिक्री को बढ़ावा मिलेगा, खासकर दोपहिया वाहनों की। लेकिन थर्ड पार्टी बीमा प्रीमियम में बढ़ोतरी से मोटरसाइकिल और स्कूटर खरीदारों के खरीद निर्णय पर असर पड़ने की संभावना है।
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वाहन उद्योग के संगठन फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले महीने 16,46,773 वाहनों की बिक्री हुई, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 5,36,795 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। हालांकि, कोविड से पहले के मई 2019 के महीने की तुलना में बिक्री लगभग 10 प्रतिशत कम थी।
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भारत में वाहन निर्माता कारखानों से थोक डिस्पैच के आंकड़े देते हैं, लेकिन ग्राहकों को की गई खुदरा बिक्री की जानकारी नहीं देते। इसलिए रजिस्ट्रेशन की संख्या को प्रॉक्सी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
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FADA के अध्यक्ष विंकेश गुलाटी ने बताया कि मई 2020 और मई 2021 में खुदरा बिक्री के रूप में कम आधार पर, पिछले महीने श्रेणियों में पंजीकरण बढ़ा, जो महामारी की पहली और दूसरी लहर के कारण कम था। उन्होंने कहा, "मई 2022 के दौरान भारतीय ऑटो उद्योग ने लगातार तीसरे महीने अपने प्रदर्शन को जारी रखा। जबकि मई 2021 के साथ YoY की तुलना सभी श्रेणियों में असाधारण रूप से स्वस्थ विकास दर को दर्शाती है, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि मई 2021 और मई 2020 दोनों कोविड के कारण राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन से प्रभावित थे। इसलिए बेहतर तुलना मई 2019 से होगी जो कि एक सामान्य प्री-कोविड महीना था।"
खुदरा बिक्री मई 2021 में 86,479 यूनिट्स और मई 2020 में 31,951 यूनिट्स थी। मई 2019 की तुलना में यात्री वाहनों और ट्रैक्टरों की खुदरा बिक्री में 11.40 प्रतिशत (263,152 यूनिट्स तक) और 33.09 प्रतिशत (52,487 यूनिट्स तक) की बढ़ोतरी हुई। दोपहिया, तिपहिया और वाणिज्यिक वाहनों के पंजीकरण अभी तक ग्रीन जोन में नहीं आए हैं। क्योंकि इन श्रेणियों में क्रमश: -13.91% (12,22,994 इकाइयों तक), -19.32% (41,508 इकाइयों तक) और -11.44% (66,632 इकाइयों तक) की गिरावट आई है।
गुलाटी ने कहा कि ईंधन पर उत्पाद शुल्क कम करने के सरकार के कदम से मुद्रास्फीति पर काबू पाने और वाहनों की बिक्री को बढ़ावा मिलेगा, खासकर दोपहिया वाहनों की। लेकिन थर्ड पार्टी बीमा प्रीमियम में बढ़ोतरी से मोटरसाइकिल और स्कूटर खरीदारों के खरीद निर्णय पर असर पड़ने की संभावना है।