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World Car-Free Day 2021: क्यों मनाया जाता है विश्व कार-मुक्त दिवस, कब हुई शुरुआत, जानें हर बात
Wed, 22 Sep 2021 10:26 AM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Wed, 22 Sep 2021 10:26 AM IST
सार
मोटर चालकों को एक दिन के लिए अपनी कार नहीं चलाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए दुनिया भर में हर साल 22 सितंबर को वर्ल्ड कार-प्री डे मनाया जाता है। लेकिन अगर आपके मन में यह सवाल है कि एक दिन कार नहीं चलाने से क्या होगा। तो इस अहम सवाल का जवाब हम इस लेख के जरिए बता रहे हैं।
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World Car Free Day
- फोटो : Twitter (File)
विस्तार
World Car-Free Day (वर्ल्ड कार-प्री डे) यानि कि विश्व कार-मुक्त दिवस क्यों मनाया जाता है। जैसा कि इसके नाम से पता चलता है, इस दिन कार-मुक्त होने के फायदों को सामने लाने और लोगों को जागरूक करने का एक मौका होता है। मोटर चालकों को एक दिन के लिए अपनी कार नहीं चलाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए दुनिया भर में हर साल 22 सितंबर को वर्ल्ड कार-प्री डे मनाया जाता है। लेकिन अगर आपके मन में यह सवाल है कि एक दिन कार नहीं चलाने से क्या होगा। तो इस अहम सवाल का जवाब हम इस लेख के जरिए बता रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, "इस कार्यक्रम में नागरिकों को कार-मुक्त होने के कई लाभों पर रौशनी डाली गई है। इसमें वायु प्रदूषण कम करना और सुरक्षित वातावरण में पैदल चलने और साइकिल चलाने को बढ़ावा देना शामिल है।"
विश्व कार-मुक्त दिवस को मनाने का उद्देश्य लोगों में पर्यावरण के संरक्षण के प्रति जागरूकता लाना है। लोगों को वाहनों से होने वाले प्रदूषण के बारे में समझाना और उन्हें जागरूक करना है।
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संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, "इस कार्यक्रम में नागरिकों को कार-मुक्त होने के कई लाभों पर रौशनी डाली गई है। इसमें वायु प्रदूषण कम करना और सुरक्षित वातावरण में पैदल चलने और साइकिल चलाने को बढ़ावा देना शामिल है।"
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विश्व कार-मुक्त दिवस को मनाने का उद्देश्य लोगों में पर्यावरण के संरक्षण के प्रति जागरूकता लाना है। लोगों को वाहनों से होने वाले प्रदूषण के बारे में समझाना और उन्हें जागरूक करना है।
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World Car-Free Day का इतिहास
1990 के दशक से आइसलैंड, यूके आदि देशों में कई अनौपचारिक कार-मुक्त दिनों का आयोजन किया जा रहा है। हालांकि, 2000 में कार्बस्टर्स (अब वर्ल्ड कार-फ्री नेटवर्क) द्वारा शुरू किए गए वर्ल्ड कार-फ्री डे के साथ अब यह अभियान वैश्विक हो गया है।
1990 के दशक से आइसलैंड, यूके आदि देशों में कई अनौपचारिक कार-मुक्त दिनों का आयोजन किया जा रहा है। हालांकि, 2000 में कार्बस्टर्स (अब वर्ल्ड कार-फ्री नेटवर्क) द्वारा शुरू किए गए वर्ल्ड कार-फ्री डे के साथ अब यह अभियान वैश्विक हो गया है।
World Car-Free Day का महत्व
वर्ल्ड कार-फ्री नेटवर्क के मुताबिक, "विश्व कार-मुक्त दिवस धरती से गर्मी को दूर करने का सही समय है। इसका मकसद शहर के योजनाकारों और राजनेताओं को इस बात के लिए प्रेरित करना है कि वे मोटर वाहनों के बजाय साइकिल चलाना, पैदल चलना और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दें।"
कारों के कारण होने वाले प्रदूषण के बारे में जागरूकता फैलाने और कार के प्रभुत्व वाले समाज के विकल्प को खोजने की जरूरत पर जोर देने के लिए दुनिया भर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
यूएनईपी की आधिकारिक वेबसाइट कहती है, "कार-मुक्त होने के नतीजे साफ तौर पर देखे जा सकते हैं। उदाहरण के लिए, पेरिस, फ्रांस में पहली बार कार-मुक्त दिन को सितंबर 2015 में आयोजित किया गया था। इसकी वजह से निकास उत्सर्जन को 40 फीसदी तक कम पाया गया था।"
वर्ल्ड कार-फ्री नेटवर्क के मुताबिक, "विश्व कार-मुक्त दिवस धरती से गर्मी को दूर करने का सही समय है। इसका मकसद शहर के योजनाकारों और राजनेताओं को इस बात के लिए प्रेरित करना है कि वे मोटर वाहनों के बजाय साइकिल चलाना, पैदल चलना और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दें।"
कारों के कारण होने वाले प्रदूषण के बारे में जागरूकता फैलाने और कार के प्रभुत्व वाले समाज के विकल्प को खोजने की जरूरत पर जोर देने के लिए दुनिया भर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
यूएनईपी की आधिकारिक वेबसाइट कहती है, "कार-मुक्त होने के नतीजे साफ तौर पर देखे जा सकते हैं। उदाहरण के लिए, पेरिस, फ्रांस में पहली बार कार-मुक्त दिन को सितंबर 2015 में आयोजित किया गया था। इसकी वजह से निकास उत्सर्जन को 40 फीसदी तक कम पाया गया था।"
ग्लोबल वार्मिंग बड़ा खतरा
मोटर वाहनों से निकलने वाले धुएं से पर्यावरण को कितना नुकसान पहुंच रहा है यह जगजाहिर है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण आज दुनिया में कई जगहों पर ग्लेशियर पिघल रहे हैं और असमय होने वाली बेतहाशा बारिश से बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है। ग्लोबल वार्मिंग एक अंतरराष्ट्रीय समस्या बन गई है। पर्यावरण के प्रदूषण बढ़ने से लोगों को इसका परिणाम भी भुगतना पड़ रहा है।
मोटर वाहनों से निकलने वाले धुएं से पर्यावरण को कितना नुकसान पहुंच रहा है यह जगजाहिर है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण आज दुनिया में कई जगहों पर ग्लेशियर पिघल रहे हैं और असमय होने वाली बेतहाशा बारिश से बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है। ग्लोबल वार्मिंग एक अंतरराष्ट्रीय समस्या बन गई है। पर्यावरण के प्रदूषण बढ़ने से लोगों को इसका परिणाम भी भुगतना पड़ रहा है।
ऐसे थम सकता है प्रदूषण
दुनियाभर की सरकारें अपने नागरिकों को ऐसे उपाय अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं जिससे पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। इसमें लोगों को वाहन शेयरिंग जैसे बाइक या टैक्सी पूलिंग करने के लिए प्रेरित किया जाता है। साथ ही पब्लिक ट्रांसपोर्ट के इस्तेमाल को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इस उपायों को अपनाने से न सिर्फ लोगों की यात्रा करने के तरीके में बदलाव आया है, बल्कि यातायात की भीड़ में भी सुधार हुआ है। मोटर वाहनों से निकलने वाला उत्सर्जन और वायु प्रदूषण भी कम हुआ है। हालांकि अब सरकारें इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को बढ़ावा दे रही हैं। साथ ही इसे अपनाने के लिए लोगों को कई इंसेंटिव और सब्सिडी भी दी जा रही है। क्योंकि बैटरी से चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों से वायु प्रदूषण नहीं फैलता है।
दुनियाभर की सरकारें अपने नागरिकों को ऐसे उपाय अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं जिससे पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। इसमें लोगों को वाहन शेयरिंग जैसे बाइक या टैक्सी पूलिंग करने के लिए प्रेरित किया जाता है। साथ ही पब्लिक ट्रांसपोर्ट के इस्तेमाल को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इस उपायों को अपनाने से न सिर्फ लोगों की यात्रा करने के तरीके में बदलाव आया है, बल्कि यातायात की भीड़ में भी सुधार हुआ है। मोटर वाहनों से निकलने वाला उत्सर्जन और वायु प्रदूषण भी कम हुआ है। हालांकि अब सरकारें इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को बढ़ावा दे रही हैं। साथ ही इसे अपनाने के लिए लोगों को कई इंसेंटिव और सब्सिडी भी दी जा रही है। क्योंकि बैटरी से चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों से वायु प्रदूषण नहीं फैलता है।