आखिर देश में इलेक्ट्रिक कारें और टू-व्हीलर्स क्यों नहीं हो रहे पॉपुलर, ये हैं 5 मुख्य वजह
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इस साल के अंत से भारत में इलेक्ट्रिक कारें सड़कों पर दिखाई देने लगेंगी, वहीं 2020 में लगभग सभी कार कंपनियां अपनी कारों के इलेक्ट्रिक मॉडल लांच कर देंगी। हालांकि परंपरागत पेट्रोल-डीजल मॉडल्स की तुलना में इलेक्ट्रिक कारें अपेक्षाकृत महंगी होंगी। वहीं सरकार की योजना है कि साल 2030 तक देश की सड़कों पर केवल इलेक्ट्रिक कारें ही दिखाई दें। इसके लिए सरकार ने ई-कारों पर सब्सिडी को बढ़ाने देने के लिए फेम-2 योजना का दूसरा चरण भी शुरू कर दिया है। वहीं हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक 2030 तक केवल 6 प्रतिशत ही इलेक्ट्रिक वाहन बिक पाएंगे।
केवल 3600 इलेक्ट्रिक कारों ही बिकीं
एसएमईवी की तरफ से जारी आंकड़ों के मुकाबिक साल 2018-19 में केवल 3600 इलेक्ट्रिक कारों की ही बिक्री हुई, वहीं इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की बिक्री की आंकड़ा 1,26,000 रहा। वहीं सबसे ज्यादा बिक्री इलेक्ट्रिक थ्री व्हीलर्स की रही और यह आंकड़ा 6,30,000 का रहा। इलेक्ट्रिक कारों के कम बिकने की पीछे बहुत सी वजह हैं। जानते हैं इसके पीछे क्या है कारण...
1- चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर
मुर्गी पहले आई या अंडा, यह सवाल कुछ ऐसा ही है। कंपनियों की सोच है कि पहले इलेक्ट्रिक कार लांच की जाएं और उसके बाद उसी औसत से चार्जिंग नेटवर्क बनाए जाएं। हालांकि सरकार की पूरी कोशिश है कि पूरे देश में चार्जिंग नेटवर्क का जाल जल्द से जल्द बिछाया जाए। वहीं दूसरी तरफ एक दिक्कत गाड़ियों में आ रहे अलग-अलग तरह के चार्जस, वोल्टेज, नेटवर्क्स और प्लग्स की है। हर चार्जिंग स्टेशन को 3 प्रकार के फास्ट चार्जिंग प्लग चाहिए- कंबाइंड चार्जिंग सिस्टम, ChadeMo प्लग और टाइप 2 एसी फास्ट चार्जर।
टाइप 2 प्लग के लिए 22 Kw का 380-480 वोल्ट का कनेक्शन चाहिए। वहीं बाकी दो के लिए 200 से 1000 वोल्ट का डीसी पावर 50 Kw के कनेक्शन की जरूरत है। इसके साथ 2 स्लो चार्जिंग पाइंट्स 10 Kw, 230 वोल्ट और 15Kw 72 वोल्ट का भारत एसी 001 और भारत डीसी 001 चार्जिंग पाइंट्स भी लगाने होंगे। ताकि स्कूटर्स, रिक्शा और फो-व्हीलर्स चार्ज किए जा सकें।
2- रेंज की समस्या
वक्त के साथ लीथियम-ऑयन बैटरी को बेहतर बनाया जा रहा है, जिससे वाहनों की रेंज में बढ़ोतरी हो रही है। लेकिन भारत में रेंज बड़ी समस्या है। महिन्द्रा ई-वेरिटो और टाटा टिगोर इलेक्ट्रिक सेडान की रेंज 80 किमी से 130 किमी तक है। वहीं ई-स्कूटर्स ओकिनावा i-Praise का दावा है कि वह सिंगल चार्ज में 150 किमी की दूरी तय कर सकता है। हालांकि यह रेंज शहरों तक तो ठीक है, लेकिन हाईवे पर इस रेंज के साथ संभव नहीं है। वहीं इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर्स की रेंज 80 किमी तक ही है।
3- कीमत
ई-वाहनों की कीमत एक बड़ा मुद्दा है। परंपरागत वाहनों के मुकाबले यह कीमत लगभग दोगुनी है। ओकिनावा i-Praise की कीमत 1.15 लाख रुपये है, जबकि मात्र 50 से 60 हजार रुपये की कीमत में पेट्रोल स्कूटर्स आ जाते हैं। टाटा टिगोर पेट्रोल सेडान की कीमत 5.2 लाख रुपये है, जबकि इलेक्ट्रिक वेरियंट की कीमत 13 लाख रुपये है। इलेक्ट्रिक वाहनों की लोकप्रियता में कमी के पीछे यह बड़ी वजह है।
4- इलेक्ट्रिक कैब का इंतजार
उबर और ओला भी अपनी फ्लीट में इलेक्ट्रिक वाहनों को शुरू करने की योजना पर काम कर रही हैं। ब्लूमबर्ग एनईएफ रिपोर्ट कहती है कि शेयर्ड मोबिलिटी सर्विसेज 2040 तक ग्लोबली तकरीबन 80 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। लेकिन यहां भी पहले मुर्गी या अंडा वाला स्थिति है। सीमित रेंज और ज्यादा कीमत इलेक्ट्रिक कैब खरीदने की राह में रोड़ा बन रही है। वहीं डीजल और सीएनजी रनिंग कॉस्ट और रेंज के मामले में बेहतर हैं।
5- टू-व्हीलर्स है वजह
इलेक्ट्रिक कारों के मुकाबले टू-व्हीलर्स और थ्री व्हीलर्स की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है और 2108-19 में दोनों सेगमेंट की साढ़े 7 लाख यूनिट्स की बिक्री हुई। वहीं अगर डबल बैटरी सिस्टम को बढ़ावा दिया जाता है, तो बिक्री में बढ़ोतरी हो सकती है। जिस हिसाब से टू-व्हीलर्स की सेल बढ़ रही है, उसे लगता है कि आगे इसमें और बढ़ोतरी होगी, क्योंकि लोग शॉर्ट रेंज के लिए इनका रुख कर सकते हैं। वहीं कारों के लिए बड़े इनवेस्टमेंट की जरूरत होती है, तो संभव है कि पर्सनल यूज के लिए कारों की कम बिक्री हो, लेकिन शेयर्ड मोबिलिटी और कमर्शियल में बढ़ोतरी होगी।