रफ्तार पकड़ेगी इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बिक्री, महंगे पेट्रोल-डीजल से परेशान ग्राहक कर रहे हैं खरीदने की तैयारी

अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 15 Sep 2020 06:06 PM IST

सार

  • वाहन बाजार के लिए सुखद संकेत, 37 फीसदी ग्राहकों ने कहा जल्द खरीदेंगे नई गाड़ी,
  • 52 फीसदी ग्राहकों ने कहा कि नई कंपनियों के वाहन भी खरीदने को तैयार
  • वर्ष 2019-20 में 3,400 इलेक्ट्रिक कारें, 1.52 लाख दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहन बिके
  • इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी क्षमता को लेकर ग्राहक सबसे ज्यादा आशंकित  
Baojun E100 Electric car Charging
Baojun E100 Electric car Charging - फोटो : Amar Ujala (For Refernce Only)
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विस्तार

द सोसाइटी ऑफ मैन्युफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (SMEV) की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2019-20 में देश भर में 3,400 इलेक्ट्रिक कारें बेची गईं। इसी दौरान 1.52 लाख दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों की सेल दर्ज की गई। यह संख्या इसके पहले के साल की तुलना में 20 फीसदी ज्यादा थी। लेकिन इसके बाद भी यह संख्या उतनी अधिक नहीं बढ़ी जितनी कि उम्मीद की जा रही थी। विशेषज्ञों का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों मेंं बैटरी की क्षमता पर लोगों का भरोसा न हो पाना इनके बाजार को बढ़ाने में सबसे बड़ी बाधा साबित हो रहा है। पर्याप्त सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की अनुपलब्धता और पेट्रोल वाहनों की तुलना में महंगा होना भी इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ोतरी को प्रभावित कर रहा है। टेरी के एक सर्वे में शामिल 37 फीसदी लोगों ने कहा है कि वे जल्दी ही कोई इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने की सोच रहे हैं, तो 28 फीसदी ने कहा कि वे भविष्य में निश्चित रूप से इलेक्ट्रिक वाहन खरीदेंगे। सुस्त पड़े ऑटो बाजार के लिए यह एक सुखद संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
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नई कंपनियों के लिए भी बराबर का मौका

इलेक्ट्रिक वाहनों के संदर्भ में ग्राहकों ने बाजार में स्थापित कंपनियों के वाहन खरीदने में रुचि दिखाई। सर्वे में 47.61 फीसदी लोगों ने कहा कि वे स्थापित कंपनियों के वाहन खरीदना चाहेंगे, जबकि 52.39 फीसदी लोगों ने कहा कि वे नई या अपेक्षाकृत कम प्रसिद्ध कंपनियों के उत्पाद खरीदने को प्राथमिकता देंगे। यानी पेट्रोल और डीजल कारों की तुलना में इलेक्ट्रिक वाहनों के मामले में नई कंपनियों के लिए भी बाजार में बराबर के मौके उपलब्ध हैं।

रिसर्च में ग्राहकों ने जताई चिंता

टेरी शोध संस्थान में रिसर्च एसोसिएट परमीत सिंह ने अमर उजाला को बताया कि भारतीय ग्राहक इलेक्ट्रिक वाहनों की उपयोगिता पर सकारात्मक रुख रखते हैं, लेकिन इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी क्षमता को लेकर आशंकित हैं। इसे दूर किए जाने की जरूरत है। दूसरी सबसे बड़ी बाधा इलेक्ट्रिक कारों की कीमतों को लेकर है। सामान्य बाजार में 8 लाख तक की कीमत में एक अच्छी कार मिल जाती है, लेकिन 200 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकने वाली इलेक्ट्रिक कारों की कीमत 15 लाख रुपये के करीब है। ऐसे में अगर सरकार कीमतों में अंतर का यह बड़ा फासला सब्सिडी के माध्यम से पाट सके तो बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों की सेल में अच्छी बढ़ोतरी की जा सकती है। ग्राहकों कि चिंता इलेक्ट्रिक वाहनों के दक्ष मैकेनिकों की कम उपलब्धता को लेकर भी है।

बैटरी क्षमता में हो रही बढ़ोतरी

इलेक्ट्रिक वाहनों में प्रयोग होने वाली बैटरी की क्षमता में लगातार सुधार हो रहा है। कंपनियां इसमें लगातार निवेश कर बैटरी क्षमता सुधार रही हैं। आज बाजार में ऐसे दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहन मौजूद हैं जो एक बार की चार्जिंग में 75-80 से लेकर 110 किलोमीटर तक की यात्रा कराने में सक्षम हैं। हीरो कंपनी अपनी बाइक फोटॉन के बारे में दावा करती है कि फुल चार्जिंग में 80-110 किलोमीटर की दूरी तय कर सकती है। टीवीएस की बाइक्स में 75 किलोमीटर और बजाज के वाहनों में 80 किलोमीटर की दूरी तय करने का दावा किया जा रहा है। इसी प्रकार कारों के बाजार में 200 किलोमीटर तक की यात्रा करने वाले वाहन भारतीय बाजार में उपलब्ध हैं। विदेशी बाजारों में इनकी क्षमता काफी अधिक बढ़ाई जा चुकी हैं।

इलेक्ट्रिक वाहनों की क्षमता पर्याप्त

इलेक्ट्रिक वाहनों की यह क्षमता इस हिसाब से पर्याप्त है कि ज्यादातर भारतीय दोपहिया उपयोगकर्ता प्रतिदिन 10 किलोमीटर से कम की यात्रा करता है। दूसरा सेगमेंट 50-100 किमी तक यात्रा करने वाला है। इस वर्ग तक के लोगों की जरूरतों के हिसाब से वाहन बाजार में आसानी से और उचित कीमत पर दोपहिया वाहन उपलब्ध हैं। 200 किमी प्रतिदिन की लंबी दूरी करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या बेहद कम है। इस तरह बैटरी की क्षमता को लेकर किए जा रहे सवाल बहुत छोटे वर्ग के ग्राहकों की असली समस्या हो सकती है जबकि बड़े वर्ग की जरूरतों के लिए वाहनों की बैटरी क्षमता पर्याप्त है।

संतुष्ट हैं ग्राहक

टेरी के एक सर्वे में शामिल 73 फीसदी इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों ने कहा कि वे पिछले तीन वर्षों से इनका इस्तेमाल कर रहे हैं और इसकी उपयोगिता से संतुष्ट हैं। ज्यादातर ग्राहकों ने अपने वाहनों को फिर से बेचने में रुचि नहीं दिखाई। यह भी उनकी संतुष्टि को दिखाता है। जबकि पेट्रोल-डीजल कारों के मामले में उच्च स्तर के ग्राहक तीन से पांच साल वाहन का उपयोग कर उसे रीसेल करने में रुचि दिखाते हैं।

सेकंड हैैंड कार बाजार की जरूरत

भारतीय बाजार में कारों की खरीद में बड़ी भूमिका सेकंड हैंड कार खरीदारों की होती है, जबकि इलेक्ट्रिक वाहनों के मामले में कम बिक्री के कारण यह बाजार अभी भी उपलब्ध नहीं हो पाई हैं। यही कारण है कि इलेक्ट्रिक वाहनों का कार बाजार अपेक्षा के मुताबिक तेजी नहीं पकड़ पा रहा है। कार खरीदते समय ज्यादातर खरीदार वाहन की रीसेल वैल्यू को भी ध्यान में रखते हैं। जबकि इलेक्ट्रिक वाहनों के मामले में रीसेल वैल्यू बहुत कम मिलती है। यह भी एक कारण है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की सेल कम हो रही है। लेकिन बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक अगर ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन बिकने लगे तो इस स्थिति में सुधार आ सकता है। लिहाजा सरकार को बैटरी कंपनियों को तकनीकी-वित्तीय मदद और सब्सिडी के जरिए वाहनों की बिक्री सुधारने पर ध्यान देना चाहिए।

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