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मसौदा अधिसूचना जारी: अक्तूबर से 15 साल पुराने वाहनों का आरसी रिन्युअल आठ गुना तक होगा महंगा

Thu, 18 Mar 2021 01:18 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Thu, 18 Mar 2021 01:18 PM IST
सार

सड़क परिवहन मंत्रालय ने पुराने वाहनों की रजिस्ट्रेशन फीस बढ़ोतरी का प्रस्ताव करते हुए एक मसौदा अधिसूचना जारी की है, जो कि नई वाहन कबाड़ नीति को लागू करने की समग्र योजना का हिस्सा है।

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RC renewal fees may increase many times from october 2021 old vehicle registration renewal fee in india
वाहनों की चेकिंग करते पुलिसकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

विस्तार

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) भारत में पुराने वाहनों की ताबूत में एक और कील ठोंकने की तैयार कर ली है। सरकार अब पुराने वाहनों के पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) के नवीनीकरण शुल्क (रिन्युअल फीस) को कई गुना बढ़ाने जा रही है। सड़क परिवहन मंत्रालय ने एक नई मसौदा अधिसूचना जारी की है, जिसमें 15 साल और इससे पुराने वाहनों के आरसी रिन्युअल फीस में बढ़ोतरी की जानकारी दी गई है। अधिसूचना के अनुसार, इस तरह के वाहनों के लिए पंजीकरण प्रमाणपत्रों का नवीनीकरण इस साल कुछ समय के बाद यानी एक अक्तूबर 2021 से महंगा हो जाएगा। और यह बढ़ोतरी सिर्फ सभी निजी वाहनों पर ही नहीं, बल्कि भारत में वाणिज्यिक (कमर्शियल) वाहनों पर लागू होगी। 

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कितनी बढ़ेगी फीस

आने वाले अक्तूबर महीने से आपको अपनी 15 साल से अधिक पुरानी कार के पंजीकरण को नवीनीकृत करने के लिए 5,000 रुपये का भुगतान करना पड़ सकता है। जो अब आप भुगतान करते हैं उससे लगभग आठ गुना ज्यादा होगा। 

इसी तरह, पुरानी बाइक के पंजीकरण नवीनीकरण का शुल्क 300 रुपये के मौजूदा शुल्क की तुलना में 1,000 रुपये होगा। 15 साल से ज्यादा पुराने बस या ट्रक के लिए फिटनेस नवीनीकरण प्रमाणपत्र हासिल करने की दर 12,500 रुपये होगी, जो कि अब भुगतान की जा रही राशि से लगभग 21 गुना अधिक है। 

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मसौदा अधिसूचना जारी

सड़क परिवहन मंत्रालय ने इस बढ़ोतरी का प्रस्ताव करते हुए एक मसौदा अधिसूचना जारी की है, जो कि नई वाहन कबाड़ नीति को लागू करने की समग्र योजना का हिस्सा है।

प्रस्ताव के अनुसार, निजी वाहनों के पंजीकरण में देरी के लिए हर महीने 300 रुपये से 500 रुपये का जुर्माना लगेगा। जबकि व्यावसायिक वाहनों के लिए फिटनेस प्रमाणपत्र के नवीनीकरण में देरी के लिए हर दिन 50 रुपये का जुर्माना भरना होगा। 

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एक्टिविस्ट उठा रहे सवाल

जैसा कि सरकार ने पुराने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को रोकने के लिए नए प्रस्तावों की घोषणा करना शुरू कर दिया है, सवाल उठ रहे हैं कि क्या सरकार दिल्ली और इसके आस-पास के इलाकों में 10 और 15 साल पुराने डीजल और पेट्रोल वाहनों पर प्रतिबंध की समीक्षा के लिए एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी।

रिपोर्ट के मुताबिक कंज्यूमर एक्टिविस्ट अनिल सूद ने कहा, "अगर सरकार पुराने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को रोकने के लिए एक नीति ला रही है, तो उसे पूरे देश के लिए एक समान होना चाहिए। इसलिए, सरकार को आदेश की समीक्षा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के पास वापस जाने की आवश्यकता है।" 

पुराने वाहनों को छोड़ेंगे लोग?

यह भी देख जाना बाकी है कि क्या सरकार इस प्रस्तावित बढ़ोतरी से इलेक्ट्रिक और वैकल्पिक ईंधन पर चलने वाले पुराने वाहनों को छूट देगी या नहीं।

वाहनों के पंजीकरण और फिटनेस प्रमाणपत्र के नवीकरण की फीस बढ़ाने से लोगों को अपने पुराने वाहनों को रखने से हतोत्साहित होने की संभावना है। निजी वाहनों के मामले में, मालिकों को 15 साल बाद हर पांच साल में आरसी का नवीनीकरण करवाना होगा। इसी तरह, एक व्यावसायिक वाहन के आठ साल पूरे होने पर हर साल फिटनेस प्रमाणपत्र का नवीनीकरण अनिवार्य है। 

वाहन स्क्रैपिंग केंद्र बनेंगे

फिटनेस टेस्ट पास करने में नाकाम रहने वाले वाहनों की स्क्रैपिंग के लिए पर्याप्त सुविधाएं बनाने के लिए, सड़क परिवहन मंत्रालय ने पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग केंद्रों की स्थापना के लिए एक मसौदा मानक तैयार किया है। 

प्रस्ताव के अनुसार, वाहन मालिक पुराने वाहन को देश के किसी भी स्क्रैपिंग सेंटर में ले जाने के लिए स्वतंत्र होगा और वह किसी नए वाहन को खरीदने के लिए कोई भी प्रोत्साहन प्राप्त करने के लिए किसी को भी स्क्रैपिंग प्रमाण पत्र हस्तांतरित कर सकता है। इसमें कहा गया है कि स्क्रैपिंग सेंटर को वाहनों के असली मालिका का पता लगाने के लिए खुद सत्यापन करना होगा ताकि उन्हें स्क्रैपिंग के लिए स्वीकार किया जा सके। 

एक अधिकारी ने बताया, "वाहन मालिक को कंपनी पुराने वाहन की एवज में जो स्क्रैप मूल्य देगी, वह बाजार भाव के मुताबिक संचालित होगा। हम इसके लिए कोई कीमत निर्धारित नहीं करेंगे।"

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