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बिक गई देश की ऐतिहासिक धरोहर, फ्रांस की कंपनी ने कर लिया सौदा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 12 Feb 2017 12:25 PM IST
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2014 में अंबेस्डर का प्रोडक्शन घाटे के चलते बंद कर दिया गया था।
आज से लगभग 70 साल पहले सन 1958 में एक कार इंडिया में लॉन्च हुई थी अंबेस्डर और इस कार ने भारत के पहचान के तौर पर लोगों के दिलों में रिश्ता बना लिया। देश के प्रधानमंत्री हों या फिर आम नागरिक सब इस कार में चलते थे। लेकिन समय बदला और राजनीति की चेहरा बदला और कार भी बदल गई। जब अटल बिहारी बाजपेयी देश के प्रधानमंत्री बने तो अंबेस्डर की जगह बीएमडब्ल्यू ने ले ली, तो इस तरह से अंबेस्डर की सवारी करने वाले अटल बिहारी बाजपेयी आखिरी पीएम थे। सालों तक देश का गौरव बनी रही ये कार लोगों के लिए बेकार हो गई और हिंदुस्तान मोटर्स ने परेशान होकर अंततः सन 2014 में अंबेस्डर का प्रोडक्शन बंद कर दिया। सबसे बुरी खबर अब आई जब यह एक फ्रांसीसी कंपनी पज्यो ने यह घोषणा की कि उसने हिंदुस्तान मोटर्स के इस आइकॉनिक कार के ब्रांड का सौदा 70 करोड़ में कर लिया।
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क्यों बेचा गया यह ब्रांड
मारुति 800 ने तोड़ दी थी इसकी कमर।
हिंदुस्तान मोटर्स की मानें इस सौदे के जरिए मिली कीमत से वह बकायादारों का कर्ज चुकाएगी। पिछले कुछ सालों में कंपनी को बेहद घाटा हुआ है। इस डील को फाइनल करने के बाद हिंदुस्तान मोटर्स के प्रवक्ता ने यह जानकारी मीडिया को दी।
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भारत में अपनी किस्मत संवारेगी पज्यो
अटल बिहारी बाजपेयी आखिरी भारतीय पीएम थे जिन्होंने अंबेस्डर कार को प्रयोग किया। इसकी जगह बीएमडब्ल्यू ने ले ली।
भले ही अंबेस्डर की कद्र देश में न हुई हो लेकिन इस के ब्रांड के जरिए पज्यो अपनी किस्मत इंडिया में संवारेगी। यह एक आइकॉनिक ब्रांड है और इस बात को पज्यो अच्छे से जानती है। अभी तक भारतीय बाजार में कोई खास करिश्मा न कर पाने वाली पज्यो अब इस ब्रांड के सहारे अपनी वह पहचान बनाने की कोशिश करेगी जो कि कई सालों पहले रॉयल एनफील्ड ने किया था।
मारुति 800 ने तोड़ दी थी कमर
1980 के दशक तक 24 हजार अंबेस्डर कारें बिकती थीं।
लगातार तीन दशक तक भारतीय बाजार पर एकछत्र राज करने वाली अंबेस्डर को सबसे बड़ी चुनौती 80 के दशक में उस समय मिली जब मारुति 800 का प्रोडक्शन शुरू हुआ और धीरे-धीरे करके अंबेस्डर की बिक्री गिरती चली गई। एक आंकड़े की बात करें तो 1980 के दशक तक 24000 अंबेस्डर कारें हर साल बेच रही थी जो कि 2012-13 में सिमटकर महज 2500 यूनिट ही रह गई थी।