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अब आप लिंक रोड के जरिए कैलाश मानसरोवर तक जा सकते हैं, पहला जत्था रवाना, सरहद पर आसानी से पहुंचेगी सेना
Fri, 08 May 2020 05:30 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Fri, 08 May 2020 05:30 PM IST
सार
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए लिंक रोड का उद्घाटन किया। इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत और थल सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवाने भी मौजूद थे।
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Rajnath Singh inaugrates Kailash Mansarovar via Link Road
- फोटो : Social Media
विस्तार
राजनाथ सिंह ने ट्वीट किया, "मानसरोवर यात्रा के लिए लिंक रोड का आज उद्घाटन करने पर प्रसन्नता हो रही है। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने धारचूला से लिपुलेख (चीन सीमा) तक सड़क संपर्क स्थापित कर लिया है। इसे कैलाश-मानसरोवर यात्रा मार्ग के तौर पर भी जाना जाता है।"
राजनाथ सिंह ने पिथौरागढ़ से गुंजी तक वाहनों के काफिले को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
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राजनाथ सिंह ने पिथौरागढ़ से गुंजी तक वाहनों के काफिले को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
इस बीच, रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उत्तराखंड में बीआरओ ने कैलाश मानसरोवर मार्ग को लिपुलेख दर्रे से जोड़ दिया है, जो सीमावर्ती गांवों और सुरक्षा बलों को संपर्क स्थापित करने में मदद करेगा।
Delighted to inaugurate the Link Road to Mansarovar Yatra today. The BRO achieved road connectivity from Dharchula to Lipulekh (China Border) known as Kailash-Mansarovar Yatra Route. Also flagged off a convoy of vehicles from Pithoragarh to Gunji through video conferencing. pic.twitter.com/S8yNeansJW
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) May 8, 2020
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मंत्रालय ने ट्वीट किया, "सीमा सड़क संगठन ने कैलाश मानसरोवर रूट को चीन बॉर्डर से जोड़ दिया है। Covid-19 महामारी का मुकाबला करते हुए, उत्तराखंड में बीआरओ ने कैलाश मानसरोवर मार्ग को 17,060 फीट की ऊंचाई पर लिपुलेख दर्रा से जोड़ा है। इस प्रकार सीमावर्ती गांवों और सुरक्षा बलों को संपर्क प्रदान किया है।"
सरहद पर आसानी से पहुंचेगी सेना
चीन सीमा को जोड़ने वाली इस सड़क के निर्माण से सरहद पर मुस्तैद सेना और अर्धसैनिक बलों को आने जाने में सहूलियत होगी। इसके साथ ही सेना, आईटीबीपी और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के जवान अग्रिम चौकियों तक वाहनों से पहुंच सकेंगे।
चीन सीमा को जोड़ने वाली इस सड़क के निर्माण से सरहद पर मुस्तैद सेना और अर्धसैनिक बलों को आने जाने में सहूलियत होगी। इसके साथ ही सेना, आईटीबीपी और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के जवान अग्रिम चौकियों तक वाहनों से पहुंच सकेंगे।
सड़क बनने में लगे 12 साल
गौरतलब है कि लिपुलेख सड़क के निर्माण का जिम्मा 2008 में बीआरओ को सौंपा गया था। विषम भोगौलिक परिस्थितियों के चलते बीआरओ को सड़क की कटान में 12 साल का वक्त लगा। अब तवाघाट से लिपुलेख सीमा तक 95 किलोमीटर सड़क की कटिंग हो चुकी है।
गौरतलब है कि लिपुलेख सड़क के निर्माण का जिम्मा 2008 में बीआरओ को सौंपा गया था। विषम भोगौलिक परिस्थितियों के चलते बीआरओ को सड़क की कटान में 12 साल का वक्त लगा। अब तवाघाट से लिपुलेख सीमा तक 95 किलोमीटर सड़क की कटिंग हो चुकी है।