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भारतीय आज भी नहीं देते कारों में सेफ्टी पर ध्यान, सेफ्टी को लेकर 20 साल आगे हैं ये देश

Tue, 26 Feb 2019 06:30 PM IST
Harendra Chaudhary ऑटो डेस्क, अमर उजाला
ऑटो डेस्क, अमर उजाला Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 26 Feb 2019 06:30 PM IST
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India is 20 years back from european countries in 5 star rating cars, here is the report
Global NCAP

भारत में आज भी कार खरीदते समय ग्राहक सुरक्षा को इतनी तवज्जो नहीं देते, जितनी कि दी जानी चाहिए। हालांकि टाटा की नेक्सन को न्यू कार एसेसमेंट प्रोग्राम के तहत भारत की सबसे सुरक्षित एसयूवी का दर्जा दिया गया। नेक्सन ने हाला ही में हुए ग्लोबल एनसीएपी क्रेश टेस्ट में यह साबित भी कर दिया। हाल ही में, देहरादून में हुई एक दुर्घटना के दौरान कार में बैठे यात्री सही सलामत बाहर निकल आए। जिसके चलते नेक्सन एक बार फिर सुर्खियों में रही। 



साल 2017-18 की सेल्स रिपोर्ट में बीते सालों के मुकाबले 10 प्रतिशत अधिक गाड़ियां भारतीय ग्राहकों ने खरीदी। हालांकि मेट्रो सिटी में इनकी बिक्री में गिरावट दर्ज की गई । जिसके पीछे बड़ा कारण पार्किंग स्पेस भी रहा। आज भी देश में कई ऐसी गाड़ियां मौजूद हैं जिन्हें एनसीएपी टेस्ट में 0 से 1 तक भी स्टार मिलें हैं। लेकिन भारतीयों के लिए आज भी कम मूल्य और ज्यादा माइलेज इतना जरूरी है कि वो सुरक्षा पर ध्यान दिए बिना ही कार खरीद लेते हैं। 

कम कीमत और ज्यादा माइलेज

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Buying new Car

जिन गाड़ियों का माइलेज ज्यादा होता है, वे ज्यादा बिकती हैं। कार का माइलेज ज्यादा आए, इस कारण कार निर्माता कंपनियां कार का वजन कम रखती हैं। वजन कम रखने के लिए आजकल कारों में फाइबर मटेरियल का ज्यादा इस्तेमाल होने लगा है। इस बात की पुष्टि खुद ग्लोबल एनकैप के चेयरमैन मैक्स मोसले ने की। उन्होंने कहा की भारत इस समय छोटी कारों की बिक्री का बड़ा बाजार बन चुका है। लेकिन आज भी सुरक्षा मानकों में यूरोप और उत्तरी अमेरिका के मुकाबले भारत इस मामले में करीब 20 साल पीछे है।

ग्लोबल एनकैप क्या है?

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suzuki jimny in ncap test
दरअसल यूरोपियन न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम की शुरुआत वर्ष 1997 में हुई थी। यूरो एनसीएपी का काम है नई−नई कारों को तोड़ना। जी हां, कारों की मज़बूती उन्हें तोड़कर ही तो जांची जा सकती है, वहीं इस टेस्ट के तहत नई कारों का क्रैश-टेस्ट किया जाता है।

क्रैश टेस्ट यह जानने का तरीका है कि ड्राइवर, पैसेंजर और यहां तक कि पैदल यात्रियों के लिए भी वे कितनी सेफ हैं। इन्हीं पैमानों पर आमतौर पर पैसेंजर कारों और SUV का क्रैश टेस्ट होता है। जिसके तहत कारों को अलग-अलग एंगल से क्रैश किया जाता है। सभी टेस्ट क्रैश लैब में किए जाते हैं। ताकि टक्कर से जुड़े सभी आंकड़े रिकॉर्ड किए जा सकें। शुरू में जहां कई कार कंपनियों ने इस टेस्ट के परिणामों की आलोचना की, वहीं आज यह स्थिति है कि दुनियाभर में इस रेटिंग को आधिकारिक तौर पर माना जाता है। 

इन पैमानों पर होता है टेस्ट...

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फ्रंटल इम्पैक्ट

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Global NCAP Car Crash Rating India - फोटो : NCAP

क्रैश टेस्ट के दौरान सीधी टक्कर में कार को 64 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से अपने बराबर के वजन वाले एक ढांचे से टकराया जाता है। टेस्ट के दौरान इस कार में आगे की सीट पर दो डमी बैठाये जाते हैं।

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साइड इम्पैक्ट

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tata nexon ncap

इस टेस्ट में एक कार दूसरी कार से 90 डिग्री पर टकराती है। जिसमें ड्राइवर सीट पर एक डमी बैठा होता है, जो 950 किलोग्राम की एक ट्रोली को ड्राइवर की साइड से टक्कर मारता है। इस ट्रोली की स्पीड 50 किलोमीटर प्रति घंटे रखी जाती है।

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