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कैसे होगी 2030 तक भारत की हर कार इलेक्ट्रिक?

Tue, 30 May 2017 03:09 PM IST
Updated Tue, 30 May 2017 03:09 PM IST
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How india will become all electric vehicle country?

देश के ऊर्जा मंत्री पीयुष गोयल ने स्पष्ट किया है कि 2030 तक देश में बिकने वाली हर कार इलेक्ट्रिक होगी और कोई भी कार यहां पर डीजल या पेट्रोल ईंधन के साथ नहीं बिकेगी। पीटीआई ने इस बात की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया है कि सरकार इलेक्ट्रिक कारों को लेकर कितनी गंभीर है। नीति आयोग द्वारा की गई एक स्टडी में यह बात सामने आई है कि अगर देश इलेक्ट्रिक वाहनों पर निर्भर हुआ तो 60 बिलियन यूएस डॉलर तेल की बचत होगी और 1 गीगा टन कार्बन उर्त्सजन देश में 2030 तक कम हो जाएगा। 

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2030 तक सरकार के इस फैसले को ऑटो इंडस्ट्री काफी महत्वाकांक्षी व चुनौतीपूर्ण मान रही हैं। पिछले दिनों ई2ओर प्लस के लॉन्चिंग पर महिंद्रा इलेक्ट्रिक के सीईओ महेश बाबू ने बताया था कि अगर देश को इलेक्ट्रिक कारों पर निर्भर होना है तो उसके लिए पूरा इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर डेवलप करने की जरूरत है जिसमें बड़े पैमाने पर फास्ट चार्जिंग स्टेशन बनाने होंगे। जिससे इलेक्ट्रिक कारों की मोबिलिटी और सुगम होगी। वहीं दूसरी ओर सोसाइटी ऑफ ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चरर के विष्‍णु माथुर का मानना है कि 2030 तक पूरी तरह से पूरा इलेक्ट्रिक होना संभव नहीं है। लेकिन अगर हमने इस लक्ष्य का 50 से 60 फीसदी भी अचीव किया तो भारतीय ऑटो इंडस्ट्री के लिए यह जबर्दस्त बदलाव होगा। 
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बीते वित्त वर्ष में बिकीं सिर्फ 2000 इलेक्ट्रिक कारें

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2015-16 की बात करें तो भारत में महज 22 हजार इलेक्ट्रिक वाहन बिके हैं जिसमें सिर्फ 2000 कारें शामिल हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है इलेक्ट्रिक कारों के लिए सही व्यवस्‍था न होना, इलेक्ट्रिक वाहनों को अगर व्यावहारिक बनाना है तो चार्जिंग प्वाइंट्स की व्यवस्‍था करनी होगी। हम अभी भले ही इलेक्ट्रिक होने की बात कर रहे हैं पर बुनियादी तौर पर इसकी शुरुआत नहीं हुई है। इसके लिए जरूरी है कि सरकार फेज के तौर पर काम करे तो शायद यह ज्यादा सही रहेगा और धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक इंफ्रास्‍ट्रक्चर मजबूत हो जाएगा। 
 

जापान में पेट्रोल पंप से ज्यादा हैं चार्जिंग स्‍टेशन

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उदाहरण के तौर पर जापान की बात करें तो यहां पर 40 हजार से अधिक चार्जिंग स्टॉप हैं जबकि पेट्रोल पंप की संख्या सिर्फ 35 हजार है। यह आंकड़े पिछले साल तक के हैं। चीन में 2016 तक 1 लाख 50 हजार पब्लिक चार्जिंग स्टेशन हैं जबकि यूएस में इनकी संख्या 42 हजार है। जबकि भारत में चार्जिंग स्टेशन ढूंढने निकलेंगे तो गिनती के मिलेंगे। यही वजह है कि अभी बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर देने की जरूरत है। 

अभी भारत में जो बैट्री इलेक्ट्रिक वाहनों में प्रयोग होती हैं उनका आयात बाहर से किया जाता है जिसकी वजह से इलेक्ट्रिक गाड़ियों की कीमत महंगी पड़ती है। भारत में ज्यादातर बैट्रियां चीन से आयात होती हैं। अगर स्‍थानीय तौर पर बैट्रियों का प्रोडक्‍शन किया जाए तो इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतों में बड़ी गिरावट आएगी। और इस दिशा में बड़ा कदम उठाना कंपनियों ने शुरू किया है जिसमें सबसे बड़ी घोषणा महिंद्रा के तरफ से आई है। हैवी मिनिस्ट्री इंडस्‍ट्रीज फिलहाल 14 हजार करोड़ के निवेश की जरूरत इसके लिए महसूस कर रही है। वित्त वर्ष 2018 के लिए अब इसके लिए सिर्फ 175 करोड़ रुपये ‌चिन्हित किया गया है। 
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