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आपके वाहन की रजिस्ट्रेशन डिटेल्स से कमाई करेगी सरकार! कंपनियों को डाटा बेचने की तैयारी

Wed, 13 Mar 2019 07:57 PM IST
Harendra Chaudhary ऑटो डेस्क, अमर उजाला
ऑटो डेस्क, अमर उजाला Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 13 Mar 2019 07:57 PM IST
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Government will make money by selling the vehicle registration data under bulk data sharing policy
Abandoned vehicles

सरकार ने एक ऐसी पॉलिसी को मंजूरी दी है, जिसमें आपके वाहन की जानकारियां दूसरी संस्थाओं को बेची जा सकेंगी। सरकार के पास हर साल लाखों वाहनों का डाटा एकत्र हो रहा है और यह हर साल बढ़ता ही जा रहा है। वहीं सरकार ने ‘बल्क डाटा शेयरिंग’ पॉलिसी को मंजूरी देते हुए इससे कमाई करने की योजना बनाई है।

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डाटा शेयरिंग में क्या शामिल होगा

न्यूज रिपोर्ट्स के मुताबिक इस पॉलिसी के तहत वाहन रजिस्ट्रेशन की कई जानकारियां शेयर की जाएंगी। जिसके तहत वाहन रजिस्ट्रेशन में 28 तरह की जानकारियों को कंपनियों के साथ साझा किया जाएगा। इनमें वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर, फाइनेंस डिटेल्स, इंश्योंरेस जैसी डिटेल्स भी शामिल हैं। हालांकि इन जानकारियों में वाहन मालिकों का नाम शामिल नहीं होगा।

 

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कौन कर सकेंगे डाटा का उपयोग

बल्क डाटा शेयरिंग पॉलिसी के तहत वाणिज्यिक संस्थान, व्यक्तिगत और शैक्षिक संस्थान शामिल होंगे। इनमें वाणिज्यिक संस्थानों को डाटा प्राप्त करने के लिए सालाना 3 करोड़ रुपये देने होंगे। वहीं शैक्षणिक संस्थानों को 5 लाख रुपये प्रति वर्ष चुकाने होंने। शैक्षिक संस्थान केवल रिसर्च के उद्देश्य और आंतरिक उपयोग के लिए ही इस डाटा का प्रयोग कर सकेंगे।

 

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वाहन एप से लग सकेगा मालिक का पता

हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि सरकार के इस कदम से गोपनियता को कितना नुकसान पहुंचेगा। इससे पहले सरकार ने खुद माना है कि डाटा को शेयर किया जा सकता है। वहीं अगर किसी वाहन की रजिस्ट्रेशन डिटेल्स बेची जाती हैं, तो वाहन एप के जरिए वाहन मालिक के नाम का पता लगाया जा सकता है। इसके अलावा फेसबुक, लिंक्डिन जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए वाहन के मालिक को ट्रैक भी किया जा सकता है।

 

डाटा लीक पर क्या होंगे कानूनी प्रावधान

वहीं इससे पहले आधार के डाटा लीक की कई बार खबरें सामने आ चुकी हैं, हालांकि अभी तक लीक के प्रभावों का आकलन नहीं हो पाया है। वहीं अगर किसी व्यक्ति और वाहन की डिटेल्स लीक होती हैं, तो उसके लिए कानूनी प्रावधान क्या होंगे। वहीं आजकल लोग टेली-कॉलर्स से परेशान हैं और ऐसे में ये डाटा प्राप्त करने वाले ये संस्थान जानकारियों को टेली-कालर्स को बेच सकते हैं या किसी मार्केटिंग रणनीति के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे वाहन मालिकों की मुश्किलें बढ़ेंगी और उन्हें ट्रैक करना आसान हो जाएगा।           

 

क्या है सरकार का तर्क

सरकार का तर्क है कि डाटा शेयरिंग को नियंत्रित तरीके से किया जाएगा और इससे परिवहन और ऑटोमोबाइल जगत को मदद मिलेगी। साथ ही डाटा शेयरिंग से सरकार को नागरिकों के लिए कई सेवाओं के सुधार में बड़ी मदद मिलेगी, साथ ही इससे देश की अर्थव्यवस्था को भी फायदा पहुंचेगा। सरकार का कहना है कि वाहन का बेसिक डाटा mParivahan App या मंत्रालय की वेबसाइट पर मौजूद है, जिसे मुफ्त में हासिल किया जा सकता है। लेकिन इसमें वाहन मालिक के नाम को इससे बाहर रखा गया है। इस जानकारी का मकसद वैधानिक अनुपालन को बढ़ावा देना है, जिसमें व्यक्तिगत किराए/ किराए या बिक्री/ वाहन की बिक्री और ड्राइवरों को नौकरी पर रखने जैसी सुविधा शामिल है।

 

बाहर के सर्वर पर नहीं भेज सकेंगे डाटा

वहीं सरकार का कहना है कि इस डाटा को बाहर के किसी सर्वर पर ट्रांसफऱ नहीं किया जा सकता। वहीं डाटा को कलेंडर वर्ष 1 जनवरी, 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर को दिया जाएगा। वहीं मंत्रालय ऑडिट के जरिए इस डाटा के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ का पता लगा सकता है। वहीं नियमों का उल्लंघन होने पर उस संस्थान के खिलाफ आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी और अगले 3 साल तक डाटा देने पर प्रतिबंध लगाया जाएगा।             

 

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