सरकार बोली, बस-मेट्रो से बढ़िया है साइकिल, सेहत बनाती है और कोरोना से भी बचाती है!
मंत्रालय ने न्यूयार्क का जिक्र करते हुए बताया है कि वहां 40 मील की नई लेन बनाई गई है, ताकि साइकिल चलाने वालों को दिक्कत न हो। वहीं ऑकलैंड में 10 फीसदी सड़कें मोटर वाहनों के लिए बंद कर दी गई हैं। कोलंबिया के बगोटा में रातों रात साइकिलिंग के लिए 76 किमी लंबी सड़क तैयार कर दी गई...
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लॉकडाउन खुलने के बाद लोग सोशल डिस्टेंसिंग के चलते निजी ट्रांसपोर्ट को वरियता देंगे, यही सोच कर ऑटोमोबाइल कंपनियां भी खुश हैं कि देर-सबेर ही सही ऑटो सेक्टर गुलजार होगा। वहीं सरकार भी अपने स्तर पर निजी परिवहन में बिना मोटर वाले को बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है।
दिया दुनिया के कई शहरों का उदाहरण
आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय ने सभी राज्यों को बिना मोटर वाले परिवहन सिस्टम जैसे साइकिल चलाने के उपायों पर गौर करने की सलाह दी है। साथ ही मंत्रालय ने कहा कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम में कैशलेस टेक्नोलॉजी को बढ़ावा दिया जाए। मंत्रालय ने दुनिया के कई शहरों का भी उदाहरण दिया है कि कैसे कोविड 19 से मुकाबले के लिए उन्होंने बिना मोटर वाले वाहनों को बढ़ावा दिया। मंत्रालय ने न्यूयार्क का जिक्र करते हुए बताया है कि वहां 40 मील की नई लेन बनाई गई है, ताकि साइकिल चलाने वालों को दिक्कत न हो। वहीं ऑकलैंड में 10 फीसदी सड़कें मोटर वाहनों के लिए बंद कर दी गई हैं। कोलंबिया के बगोटा में रातों रात साइकिलिंग के लिए 76 किमी लंबी सड़क तैयार कर दी गई।
सार्वजनिक परिवहन में 90 फीसदी तक की गिरावट
आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय का कहना है कि लॉकडाउन के चलते सार्वजनिक परिवहन में 90 फीसदी तक की गिरावट हुई है। वहीं कोरोना का असर अभी काफी दिन तक दिखाई देने वाला है, ऐसे में राज्यों को परिवहन के दूसरे विकल्पों के बारे में भी विचार करना चाहिए। मंत्रालय ने सलाह दी है कि राज्यों को चाहिए कि वह बिना पेट्रोल-डीजल से चलने वाले वाहनों पर जोर दें।साइकिल को लागू करने का सही समय
केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने कहा कि गैर-मोटर चालित परिवहन प्रणालियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए और पूरे भारत में इन्हें पुनर्जीवित किया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि शहरों में अधिकांश यात्राएं पांच किमी से कम दूरी वाली होती हैं, ऐसे में कोविड-19 संकट के दौरान गैर-मोटर चलित वाहन जैसे साइकिल को लागू करने का सही समय है। क्योंकि इसके लिए कम लागत और कम मानव संसाधन की जरूरत होती है।तीन-स्तरीय रणनीति
सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों के लिए, मंत्रालय ने "तीन-स्तरीय रणनीति" का सुझाव दिया है, इसमें लघु (छह महीने), मध्यम (एक वर्ष) और दीर्घकालिक (एक से तीन वर्ष) उपायों सुझाए हैं। मंत्रालय का कहना है कि यह जरूरी है कि सार्वजनिक परिवहन के जरिये संक्रमण फैलने पर अंकुश लगाया जाए, जिससे स्वच्छता, रोकथाम और सामाजिक सुरक्षा के उपायों को अपनाया जा सके।
उन्होंने कहा कि BHIM, PhonePe, Google पे और नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड जैसे टचलेस सिस्टम सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों के संचालन में मानव संपर्क को कम करने में मदद करेंगे।