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क्या कार की बॉडी पर कलाकृति करवाने से रद्द हो सकता है गाड़ी का रजिस्ट्रेशन? ये रहा जवाब

Thu, 16 Jul 2020 12:39 PM IST
श्रीधर मिश्रा ऑटो डेस्क, अमर उजाला
ऑटो डेस्क, अमर उजाला Published by: श्रीधर मिश्रा Updated Thu, 16 Jul 2020 12:39 PM IST
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Can car registration be canceled by getting the artwork done on the body of the car? Here is the answer
Car Paint - फोटो : Pixabay

सोचिए अगर आप किसी व्यक्ति से सेकेंड हैंड या यूज्ड कार खरीद रहे हैं और गाड़ी के पूरे कागज होने के बावजूद भी उसका रजिस्ट्रेशन करने से मना कर दिया जाए, तो आप क्या करेंगे? जी हां, ऐसा ही कुछ चंडीगढ़ में रहने वाले एक ग्राहक के साथ हुआ, जिन्होंने थक हार कर फिर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया। हालांकि, कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए उनके हक में फैसला सुनाया। लेकिन यह जानना जरूरी है कि आखिर ये सब हुआ कैसे? और अधिकारियों ने उनकी गाड़ी का रजिस्ट्रेशन करने से क्यों मना कर दिया।

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क्या था यह मामला? 


जुलाई 2019 में याचिकाकर्ता ने दिल्ली में पोस्टेड यूरोपीय संघ के काउंसिलर से एक गाड़ी खरीदी। यह वाहन Ambassador Grand [Green C-1800 (BSIII), 2009] है। कार को खरीदने के बाद याचिकाकर्ता के पास यह गाड़ी अगस्त 2019 में चंडीगढ़ पहुंची। इसके बाद जब उन्होंने इसके रजिस्ट्रेशन के लिए चंडीगढ़ में प्राधिकरण को अवेदन किया, तो वहां गाड़ी का पंजीकरण करने से मना कर दिया गया। खास बात यहां यह है कि याचिकाकर्ता के पास दिल्ली में पंजीकृत अधिकारियों से नो ऑब्जेक्शन प्रमाणपत्र से लेकर सभी आवश्यक दस्तावेज थे, लेकिन फिर भी गाड़ी को पंजीकृत करने से मना कर दिया गया। 

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रजिस्ट्रेशन के लिए क्यों मना किया?


अधिकारियों का कहना था कि गाड़ी की बॉडी पर आर्टवर्क (कलाकृति) की गई है।
 

याचिकाकर्ता ने क्यों खरीदी थी कार?


याचिकाकर्ता ने दिल्ली से इस गाड़ी को केवल इसलिए खरीदा था, क्योंकि इस पर प्रसिद्ध मैक्सिकन कलाकार Senkoe की तरफ से कार की बॉडी पर Art Work किया गया था।

अधिकारियों की दलील


अधिकारियों के पक्ष की तरफ से दलील दी गई कि कार का रंग सफेद था जो अब कई रंगों (मल्टीकलर) में बदल गया है। मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 45 का तर्क देते हुए कहा गया कि यह याचिका गलत है। अधिकारियों की तरफ से कहा गया कि याचिकाकर्ता ने गाड़ी की गलत जानकारी दी। क्योंकि गाड़ी का रंग सफेद बताया गया था और चेक करने के दौरान वह रंगीन पाया गया। इसके साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि किसी भी वाहन को इस तरह नहीं बदला जा सकता है कि कंपनी ने जिस तरह गाड़ी को बनाया है, उसका मूल-स्वरुप ही बदल जाए। अधिकारियों की तरफ से यह भी कहा गया कि अक्सर चोरी की गई गाड़ियों के मूल स्वरूप को बदल कर रजिस्ट्रेशन कराने की कोशिश होती है।

कोर्ट में याचिकाकर्ता ने क्या कहा?


याचिकाकर्ता ने कहा कि बिना पंजीकरण न तो वाहन का बीमा हो सकता है और न ही उसे सड़क पर चलाया जा सकता। ऐसे में यह कार किसी भी काम की नहीं रही। याचिकाकर्ता ने कहा कि गाड़ी का मूल रूप अभी भी सफेद ही है, बस उसके ऊपर आंशिक रूप से डिजाइन बनाया गया है। याचिकाकर्ता ने कहा कि ऐसी कई गाड़ियां दिल्ली की सड़कों पर चल रही हैं।


अदालत का फैसला


अदालत ने सुनवाई के दौरान कई नियमों पर ध्यान दिया। बाद में अदालत ने अपने फैसले में कहा कि ऐसी गाड़ियों का इस्तेमाल तब चोरी के लिए किया जा सकता है, जब गाड़ी के कागज अधूरे हों। लेकिन यहां याचिकाकर्ता के पास सारे कागज हैं। ऐसे में कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सारे कागज पंजीकरण के लिए दिखाने को कहा और अगर इसके लिए याचिकाकर्ता को कुछ समय चाहिए तो वो भी देने के लिए कहा। कोर्ट ने कहा कि अगर सारे कागज मौजूद हैं, तो रजिस्ट्रेशन के लिए मना नहीं किया जा सकता।

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