आॅटो कंपनियां दे रही देश में इलेक्ट्रिक वाहनों पर जोर, देखें क्या है वजह
देश की राजधानी दिल्ली लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण से जूझ रही है, इसलिए हवा की गुणवत्ता में काफी हद तक गिरावट आई है और दिल्ली में प्रदूषण का स्तर “बहुत खराब“ की श्रेणी में पहुंच गया है। इस प्रदूषण का वास्तविक कारण दिल्ली में स्थित नहीं है बल्कि आसपास के राज्यों और फसलों के अवशेष को जलाने और वाहन प्रदूषण के कारण है।
परिवहन वर्ग के कारण होने वाला प्रदूषण समान रूप से जिम्मेदार है और ये करीब करीब पूरा साल बना रहता है। इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने से भारत को अपनी जलवायु परिवर्तन प्रतिबद्धताओं को प्राप्त करने में रणनीति बनाने में काफी मदद मिलेगी।
यह एक ऐसे देश में महत्वपूर्ण है जो अब अमेरिका और चीन के बाद ग्रीनहाउस गैसों का सबसे बड़ा उत्सर्जक है, और जो जलवायु परिवर्तन के लिए सबसे कमजोर देशों में से एक है। इलेक्ट्रिक वाहन (ईवीएस), विशेष रूप से, ऊर्जा सुरक्षा में वृद्धि और ग्रीनहाउस गैसों और अन्य प्रदूषकों के उत्सर्जन को कम करने के सबसे आशाजनक उपायों में से एक का प्रतिनिधित्व करते हैं।
आज, देश एक प्रभावी दीर्घकालिक टिकाऊ पहल की मांग करता है जैसे पूरे भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सिस्टम को शुरू करना, जो बढ़ते कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद कर सकता है,
सरकार द्वारा प्रदान किए गए हमारे देश में एक प्रमुख बाधा उचित आधारभूत संरचना की कमी है। इलेक्ट्रिक वाहनों के कारण भी कुछ समस्याएं सामने आती हैं जिनको हम ने हल करना है और इनको जल्दबाजी में प्रोत्साहित करने से पहले उनके वैज्ञानिक समाधानों को लागू करने की आवश्यकता है।
इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग बढ़ाने के लिए हमें पहले आधारभूत संरचनाओं को स्थापित करने की जरूरत है जैसे कि चार्जिंग स्टेशनों को स्थापित करना, इलेक्ट्रिक वाहनों के सभी वर्गों के लिए अनुदान योजना, जिनमें दोपहिया, तीन पहिया और चार पहिया वाहन भी शामिल हैं।
इनमें टैक्सीज और इलेक्ट्रिक बसों को भी शामिल किए जाए जिनको सार्वजनिक परिवहन में उपयोग किया जा सकता है। इससे ग्रीन व्हीकल्स को प्रोत्साहित करने और प्रदूषण को काबू करने में मदद मिलेगी।
इस मौके पर श्री आयुष लोहिया, सीईओ, लोहिया ऑटो इंडस्ट्रीज ने कहा कि ऑड-ईवन योजना को लागू करना या पुराने वाहनों पर पाबंदी लगाने से दिल्ली की प्रदूषण की समस्या का कोई समाधान नहीं होने वाला, हमें दिल्ली प्रदूषण को रोकने के लिए स्थायी समाधान की जरूरत है।
इलेक्ट्रिक ट्रांसपोर्टेशन से हालात को काबू किया जा सकता है लेकिन उसके लिए पहले उचित आधारभूत संरचनाओं और सरकारी समर्थन की व्यापक जरूरत है।