BS6 के बाद ये नए मानक बने ऑटो सेक्टर के लिए ‘आफत’, कैसे दें बेहतरीन माइलेज वाली गाड़ियां
मारुति फिलहाल अपनी पांच गाड़ियों सियाज, अर्टिगा, XL6, विटारा ब्रेजा और एस-क्रॉस में माइल्ड हाईब्रिड टेक्नोलॉजी दे रही है। ये सभी गाड़ियां 1.5 लीटर पेट्रोल इंजन के साथ आती हैं...
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महामारी से आटोमोबाइल सेक्टर अभी उबर भी नहीं पाया है कि एक नई ‘आफत’ उसे सिर पर आकर खड़ी हो गई है। पहले ही महामारी के चलते वाहनों की बिक्री में गिरावट जारी है। ऐसे में अगर कोई नए नियम लागू होते हैं तो ऐसी हालत ऑटों कंपनियों के पास निवेश के भारीभरकम रकम भी नहीं है। कंपनियां पहले ही बीएस6 उत्सर्जन मानकों को पूरा करने के लिए बड़ी रकम निवेश कर चुकी हैं।
क्या हैं कैफे मानक
वहीं अब ऑटो सेक्टर को कैफे (कारपोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी) मानकों को पूरा करना है, लेकिन उसके लिए कंपनियों के पास जरूरी निवेश नहीं है। ये नए नियम अप्रैल 2022 से लागू होने हैं। जहां बीएस6 उत्सर्जन मानकों का जोर नए वाहनों से कम जहरीली गैसों के उत्सर्जन को रोकना था, वहीं कैफे मानकों के तहत वाहन निर्माता कंपनियों को वाहनों की ईंधन दक्षता में सुधार के साथ कार्बन डाई ऑक्साइड के उत्सर्जन को घटाना है। कैफे नियमों में औसत कारपोरेट कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन 2022 तक 130 ग्राम प्रति किमी और उसके बाद 113 ग्राम प्रति किमी तक लाना है।
डीजल इंजन से क्यों किया परहेज
इससे पहले कैफे मानकों को 2017 में पेश किया गया था, जहां वाहन निर्माताओं को उम्मीद थी कि डीजल ईंधन पर ध्यान केंद्रित करने से उन्हें फायदा होगा। क्योंकि आमतौर पर माना जाता है कि पेट्रोल के मुकाबले डीजल ज्यादा फ्यूल एफिशिएंट है। लेकिन सरकार की नई नीति में स्वच्छ ईंधन का वरियता दी गई। जिससे डीजल कारों की बिक्री में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई। वहीं बीएस6 मानकों को पूरा करने के लिए स्वच्छ डीजल इंजन विकसित करने में अतिरिक्त निवेश उनके लिए घाटे का सौदा था। कार निर्माताओं ने नए समाधान के तहत हाइब्रिड तकनीक को उपयुक्त माना।
मारुति का हाईब्रिड पर फोकस
ऑटो सेक्टर से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक कैफे मानकों को पूरा करने के लिए सबसे बेहतरीन विकल्प हाईब्रिड हैं। लेकिन इसमें आने वाली लागत तभी घटाई जा सकती है, सरकार हाईब्रिड को बढ़ावा देने के लिए कोई नीति पेश करे और जरूरी उपकरणों पर जीरो ड्यूटी लगाए। वहीं मारुति सुजुकी ने पिछले 15 सालों में CO2 उत्सर्जन का स्तर 20 फीसदी तक कम किया है। चालू वित्त वर्ष में यह 109 ग्राम प्रति किमी है, जो कि सबसे कम है। वहीं मारुति अब हाईब्रिड पर फोकस कर रही है और उसमें निवेश बढ़ा रही है, इसके अलावा वह सीएनजी वाहनों की संख्या बढ़ा ररही है, ताकि फ्यूल एफिशिएंसी के मानकों को 2022 तक पूरा किया जा सके।
मारुति की पांच कारों में माइल्ड हाईब्रिड टेक्नोलॉजी
मारुति फिलहाल अपनी पांच गाड़ियों सियाज, अर्टिगा, XL6, विटारा ब्रेजा और एस-क्रॉस में माइल्ड हाईब्रिड टेक्नोलॉजी दे रही है। ये सभी गाड़ियां 1.5 लीटर पेट्रोल इंजन के साथ आती हैं। वहीं सात मॉडल्स सीएनजी के साथ आते हैं। वहीं कुछ कंपनियां जैसे होंडा अभी भी फ्यूल एफिशिएंट पेट्रोल इंजन के अलावा बीएस6 डीजल इंजन पर भी भरोसा कर रही है। जबकि ह्यूंदै और किआ कैफे मानकों को देखते हुए टर्बोचार्ज्ड इंजन पेश कर रही हैं।
छोटे इंजन ज्यादा दमदार
1,000 सीसी से 1400 सीसी के बीच आने वाले इन इंजन में टर्बोचार्जर डिवाइस लगी होती, जो इंजन से निकलने वाली गर्म गैसों को इसमें लगा टर्बाइन अपने अंदर खींच लेता है और कंप्रेस हवा को वापस इंजन सिलंडर में भेज देता है। जिससे हवा और ईंधन का मिश्रण का अच्छे से दहन होता है। यही वजह है कि ये छोटे टर्बो चार्ज्डस इंजन बड़े इंजनों के मुकाबले ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं, ये न केवल बड़े इंजनों से ज्यादा ताकतवर हैं बल्कि ईंधन की कम खपत भी करते हैं।
इलेक्ट्रिक कारों पर फोकस
ह्यूंदै और किआ इस समय सात मॉडल्स में ये टर्बो चार्ज्ड इंजन दे रही हैं, वहीं बाकी दूसरी कार कंपनियां जैसे रेनो-निसान, टाटा, स्कोडा और फॉक्सवैगन भी इसी तकनीक के साथ पेट्रोल इंजन पेश कर रही हैं। वहीं इन कैफे मानकों को देखते हुए एमजी मोटर, टाटा और ह्यूंदै इलेक्ट्रिक कारों पर भी फोकस कर रही हैं। ऑटो विशेषज्ञों का कहना है कि नए कैफे मानक ऑटो इंडस्ट्री में कार्बन फुटप्रिंट का नामोनिशान मिटाने में मददगार साबित होंगे।