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Fine: दिल्ली-NCR के 63% ड्राइवरों को इस अहम दस्तावेज के बारे में पता ही नहीं, लग सकता है ₹10,000 का जुर्माना
Thu, 12 Dec 2024 04:33 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Thu, 12 Dec 2024 04:33 PM IST
सार
दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में, जहां वायु प्रदूषण हर साल एक लगातार बढ़ती हुई समस्या बनी हुई है, एक हालिया रिपोर्ट ने एक चिंताजनक ट्रेंड को जाहिर किया है।
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Air Pollution
- फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में, जहां वायु प्रदूषण हर साल एक लगातार बढ़ती हुई समस्या बनी हुई है, एक हालिया रिपोर्ट ने एक चिंताजनक ट्रेंड को जाहिर किया है। पार्क+ रिसर्च लैब्स की सर्वेक्षण, जिसमें पूरे क्षेत्र के 5,200 कार मालिकों के जवाब शामिल थे, से पता चलता है कि 63 प्रतिशत उत्तरदाताओं को अपने प्रदूषण नियंत्रण (PUC) प्रमाणपत्र की स्थिति के बारे में पता नहीं है। जोकिमोटर वाहन अधिनियम के तहत एक अनिवार्य दस्तावेज है।
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इस चिंताजनक आंकड़े में यह भी जोड़ा गया कि 11 प्रतिशत कार मालिकों ने यह भी नहीं पता था कि पीयूसी प्रमाणपत्र क्या होता है या इसे कहां रिन्यू किया जाता है। जबकि 27 प्रतिशत ने प्रदूषण के स्तर को बढ़ाने में गैर-पीयूसी-प्रमाणित वाहनों की भूमिका के बारे में पूछे जाने पर उदासीनता स्वीकार की।
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) के एक अध्ययन के अनुसार, जागरूकता की यह कमी विशेष रूप से उस क्षेत्र में चिंताजनक है जहां वाहनों से निकलने वाले उत्सर्जन का पीएम 2.5 के स्तर में 40 प्रतिशत और नाइट्रोजन ऑक्साइड (एनओएक्स) में 81 प्रतिशत का योगदान है।
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) के एक अध्ययन के अनुसार, जागरूकता की यह कमी विशेष रूप से उस क्षेत्र में चिंताजनक है जहां वाहनों से निकलने वाले उत्सर्जन का पीएम 2.5 के स्तर में 40 प्रतिशत और नाइट्रोजन ऑक्साइड (एनओएक्स) में 81 प्रतिशत का योगदान है।
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पीयूसी के अनदेखी की कीमत
दिल्ली में वाहन मालिकों के लिए, पीयूसी प्रमाणन की अनदेखी के नतीजे पर्यावरण को होने वाले नुकसान से भी ज्यादा गंभीर हैं। अनुपालन न करने पर 10,000 रुपये का भारी जुर्माना लग सकता है। जिसमें चालान सीधे अदालतों के जरिए संसाधित किए जा सकते हैं। उल्लंघन के बारे में सूचना मोबाइल फोन के जरिए भेजी जाती है।
दिल्ली में वाहन मालिकों के लिए, पीयूसी प्रमाणन की अनदेखी के नतीजे पर्यावरण को होने वाले नुकसान से भी ज्यादा गंभीर हैं। अनुपालन न करने पर 10,000 रुपये का भारी जुर्माना लग सकता है। जिसमें चालान सीधे अदालतों के जरिए संसाधित किए जा सकते हैं। उल्लंघन के बारे में सूचना मोबाइल फोन के जरिए भेजी जाती है।
लेकिन मुद्दा सिर्फ जुर्माने का नहीं है, बल्कि जवाबदेही का है। हर साल सर्दियों के करीब दिल्ली एनसीआर का AQI अक्सर खतरनाक स्तर को पार कर जाता है। ऐसे में प्रदूषण को कम करने में व्यक्तिगत कार मालिकों की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।
दिल्ली एनसीआर में रहने वाले 3 करोड़ लोग सर्दियों के धुंध और उसके स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभावों से जूझ रहे हैं। इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि वाहन मालिक अपनी जिम्मेदारी से मुंह न मोड़ें। नियमित रखरखाव और पीयूसी मानदंडों का अनुपालन छोटे लेकिन प्रभावशाली कदम हैं। जो सामूहिक रूप से एक बड़ा बदलाव ला सकते हैं।