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हिंदू नववर्ष में शनिदेव होंगे राजा और मंत्री सूर्य, ज्योतिष नजरिए से जानिए इसका मतलब

Sat, 06 Apr 2019 10:10 AM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Sat, 06 Apr 2019 10:10 AM IST
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Vikram Samvat 2076 start from 6 march chaitra navratri
नव संवत्सर 2076
भारतीय कैलेंडर की गणना सूर्य और चंद्रमा के अनुसार होती है। जिसके अनुसार नया साल चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से होता है। इसे नव संवत्सर भी कहते हैं। इस बार यह 6 अप्रैल से शुरू होगा।  शनिवार से नव संवत्सर विक्रम संवत 2076 और शक संवत 1941 शुरू हो जायेगा। इस नव संवत्सर का नाम परिधावी होगा। इन नववर्ष में राजा शनि और मंत्री सूर्य होंगे।  परिधावी संवत्सर में सामान्यतः अन्न महंगा , मध्यम वर्षा, प्रजा में रोग ,उपद्रव अदि होते हैं और इसका स्वामी इन्द्राग्नि कहा गया है ।
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शनि राजा व मंत्री सूर्य का ज्योतिष महत्व
इस  परिधावी संवत्सर के आकाशीय मंत्रिमंडल के गठन के अनुसार राजा शनि और मंत्री सूर्य होंगे, जबकि पिछले वर्ष राजा सूर्य थे और मंत्री शनि महाराज थे। शनि न्याय के देवता हैं इसलिए इस वर्ष भारत को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यथोचित न्याय मिलेगा। शनि और सूर्य के परस्पर विरोधी होने के कारण स्थितियां सुखद नहीं रहेंगी। पूरा आकाशीय मंत्रिमंडल और उसका प्रभाव इस प्रकार रहेगा।
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संवत राजा- शनि 
कुछ पारस्परिक विरोध और टकराव की स्थिति राष्ट्र में देखी जा सकती है। राजनेताओं के मध्य भी स्थिति असंतोषजनक होगी, एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगेंगे। प्राकृतिक रुप से भी परेशानी झेलनी पड़ेगी, बाढ़ एवं सूखे की समस्या देश के कई राज्यों को प्रभावित करेगी। अस्थिरता व भय का माहौल भी होगा।
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संवत मंत्री- स्वामी सूर्य 
सूर्य के मंत्री पद में आने पर राजनैतिक क्षेत्र में हलचल बढ़ जाती है। केन्द्र और राज्य सरकारों के मध्य विवाद अधिक देखने को मिल सकता है। आर्थिक क्षेत्र अच्छा रहता है। धन धान्य में वृद्धि होती है। सरकारी नीतियां कठोर हो सकती हैं। दोषियों को सरकार का दंश झेलना पड़ सकता है।

सस्येश (फसलों) का स्वामी- मंगल 
अनाज महंगा हो सकता है। इस समय पर मौसम की प्रतिकूलता के चलते खेती को नुकसान हो सकता है।

मेघेश का स्वामी- शनि
मेघेश शनि हैं, इस कारण कहीं अधिक वर्षा तो कहीं सूखे की स्थिति बनेगी। इस कारण जान-माल का नुकसान भी होगा। राज्य में नियमों की कठोरता के कारण लोगों के मन में चिंता और विरोध की स्थिति भी पनपेगी। बीमारी का प्रभाव लोगों पर शीघ्र असर डाल सकता है।

रसेश गुरु का प्रभाव
रसेश का स्वामी गुरु के होने से साधनों की वृद्धि होगी। आर्थिक रुप से संपन्न लोगों के लिए समय ओर अनुकूल रह सकता है। रसदार फल और फूलों की पैदावर भी अच्छी होगी। विद्वानों को उचित सम्मान भी प्राप्त हो सकेगा।

नीरसेश मंगल का प्रभाव
नीरसेश अर्थात रसहीन यानि धातुएं, इनका स्वामी मंगल के होने से माणिक्य, मूंगा पुखराज इत्यादि में महंगाई देखने को मिल सकती है। गर्म वस्त्र, चंदन लाल रंग की वस्तुएं ताम्बा, पीतल में तेजी देखने को मिलेगी।

फलेश शनि का प्रभाव
इस समय वृक्षों पर फूल कम लग पाएंगे ऐसे में फलों का उत्पादन भी कम होगा। पर्वतीय स्थलों पर मौसम की अनियमितता के कारण अधिक परेशानी झेलनी पड़ सकती है।

धनेश मंगल का प्रभाव
इस समय में मंगल के धनेश होने से महंगाई का दौर अधिक रहने वाला है। व्यापार से जु़डी वस्तुओं में उतार-चढा़व की स्थिति बनी रहने वाली है। इस समय देश में आर्थिक स्थिति और अनाज उत्पादन में अनियमितता के कारण परेशानी अधिक रह सकती है।


दुर्गेश शनि का प्रभाव
दुर्गेश अर्थात सेना के स्वामी इस समय शनि होंगे। इस स्थिति के चलते अराजकता को निपटाने के लिए कठोर नियमों का सहारा लिया जा सकता है। इस समय जातीय सांप्रदायिक मतभेद भी उभरेंगे। 10 विभागों में से 6 विभाग क्रूर ग्रहों के पास और 4 विभाग सौम्य ग्रहों के पास रहेंगे। राजा शनि के धनु राशि में होने से धार्मिक मामलों का निपटारा हो सकता है।

नवरात्रि के 9 दिनों में कलश स्थापना और अखंड ज्योति के साथ देवी दुर्गा की करवाएं विशेष पूजा।


 
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