घर का मुख्य द्वार हमेशा वास्तु को ध्यान में रखकर बनाना चाहिए। ये हमारे घर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। घर के दरवाजे से ही हर तरह की ऊर्जा का आगमन होता है। इसलिए मुख्य दरवाजे को ध्यान में रखकर बनाना और भी आवश्यक होता है। घर का द्वार अगर सही तरह से बना होगा तो घर के अंदर सकारात्मक ऊर्जा आती है। मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है तो आइए जानते हैं कैसा होना चाहिए घर का मुख्य द्वार....
घर का मुख्य द्वार के लिए उत्तर- उत्तर पूर्व या पश्चिम दिशा शुभ मानी गई हैं। एक ही पंक्ति में तीन दरवाजे नहीं होने चाहिए, ये घर की समृद्धि को प्रभावित करते हैं घर के दरवाजे को साफ- सुथरा और सजाकर रखना चाहिए। घर के दरवाजे को आम के पत्तों या अशोक के पत्तों की तोरण बनाकर सजाना चाहिए।
विशेष ध्यान रखें की घर का दरवाजा खोलते समय किसी भी प्रकार की आवाज नहीं होनी चाहिए। दरवाजा आसानी से खुलना और बंद होना चाहिए। दरवाजे के पेंच में हमेशा तेल डालकर रखना चाहिए जिससे आवाज न हो। अगर द्वार खोलते या बंद करते समय किसी भी प्रकार की आवाज होती है तो धन आने में रूकावट आती है।
घर के मुख्य द्वार के सामने की जगह हमेशा खुली हुई होनी चाहिए। दरवाजे के सामने किसी भी तरह रूकावट डालने वाली चीज नहीं होनी चाहिए। द्वार के ऊपर कभी भी वृक्ष की छाया नहीं होनी चाहिए। इसका असर घर के सदस्यों के स्वास्थ पर पड़ता है। अगर दरवाजे के सामने अवरोध है तो घर के द्वार पर एक तुलसी का पौधा लगाएं और स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं, जिससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश नहीं होगा।
घर का मुख्य द्वार हमेशा दो पल्लों का ही बनवाएं इससे घर में धन-धान्य की कमी नहीं होती है। घर के स्वामी कr आयु में वृद्धि होती है। अन्य दरवाजों की तुलना में घर का मुख्य द्वार आकार में बढ़ा होना चाहिए। क्योंकि मुख्य दरवाजे से ही हमारे घर में खुशियां आती हैं।