Mahashivratri Vastu Tips: महाशिवरात्रि पर घर लाएं छोटा सा पारद शिवलिंग, दूर होगा वास्तु दोष
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Mahashivratri Vastu Tips: 08 मार्च, शुक्रवार को महाशिवरात्रि है। महाशिवरात्रि का यह पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आता है। महाशिवरात्रि के बारे में कहा जाता है कि इसी दिन भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इस दिन पारद शिवलिंग की पूजा करने का महत्व काफी अधिक है। मान्यता है कि शिवरात्रि पर शिवलिंग के दर्शन करने की परंपरा है। इस दिन जो लोग मंदिर नहीं जा सकते, उन्हें घर में ही शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए। अगर घर में शिवलिंग नहीं है तो महाशिवरात्रि पर छोटा सा पारद शिवलिंग घर ला सकते हैं।
घर में पारद शिवलिंग रखा हो तो वास्तु दोष भी दूर होते हैं। शिवपुराण पारद शिवलिंग का महत्व बताया गया है। शिवपुराण में लिखा है कि-
लिंगकोटिसहस्त्रस्य यत्फलं सम्यगर्चनात्।
तत्फलं कोटिगुणितं रसलिंगार्चनाद् भवेत्।।
ब्रह्महत्या सहस्त्राणि गौहत्याया: शतानि च।
तत्क्षणद्विलयं यान्ति रसलिंगस्य दर्शनात्।।
स्पर्शनात्प्राप्यत मुक्तिरिति सत्यं शिवोदितम्।।
उपरोक्त श्लोक का अर्थ है कि करोड़ों शिवलिंगों की पूजा से जो पुण्य फल मिलता है, उससे भी करोड़ गुना ज्यादा फल पारद शिवलिंग की पूजा और दर्शन से मिल जाता है। पारद शिवलिंग के स्पर्श मात्र से सभी पापों से मुक्ति मिल सकती है।
कैसे बनता है पारद शिवलिंग
जैसा कि नाम से विदित है पारद शिवलिंग पारे से निर्मित किया जाता है। इसके लिए सबसे पहले पारे को साफ किया जाता है। इसके लिए अष्ट-संस्कार किए जाते हैं। कई औषधियां मिलाकर तरल पारे का बंधन किया जाता है यानी ठोस किया जाता है। अष्ट संस्कार में करीब 6 महीने लगते हैं। इसके बाद बाकी प्रक्रिया में 2-3 महीने का समय लग जाता है, तब पारे से शिवलिंग बनकर तैयार होता है।
पारद शिवलिंग घर पर रखते समय रखें इन बातों का ध्यान
घर में जहां शिवलिंग रखा हो, वहां साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। रोज सुबह-शाम शिवलिंग के पास दीपक जलाएं। भोग लगाएं। घर में क्लेश न करें और शिवजी के मंत्र ऊँ नम: शिवाय, ऊँ सांब सदा शिवाय नम: का जाप कर सकते हैं।
पारद शिवलिंग की पूजन विधि
पारद शिवलिंग साक्षात भगवान शिव का ही रूप है इसलिए इसकी पूजा विधि-विधान से करने से कई गुना फल प्राप्त होता है तथा हर मनोकामना पूरी होती है। घर में पारद शिवलिंग सौभाग्य, शान्ति, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के लिए अत्यधिक सौभाग्यशाली है। दुकान, ऑफिस व फैक्टरी में व्यापारी को बढाऩे के लिए पारद शिवलिंग का पूजन एक अचूक उपाय है। शिवलिंग के मात्र दर्शन ही सौभाग्यशाली होता है। इसके लिए किसी प्राणप्रतिष्ठा की आवश्कता नहीं हैं। पर इसके ज्यादा लाभ उठाने के लिए पूजन विधिपूर्वक की जानी चाहिए। पूजन विधि इस प्रकार है।
- सर्वप्रथम शिवलिंग को सफेद कपड़े पर आसन पर रखें। स्वयं पूर्व-उत्तर दिशा की ओर मुँह करके बैठ जाए। अपने आसपास जल, गंगाजल, रोली, मोली, चावल, दूध और हल्दी, चन्दन रख लें।
- सबसे पहले पारद शिवलिंग के दाहिनी तरफ दीपक जला कर रखो। थोडा सा जल हाथ में लेकर तीन बार निम्न मन्त्र का उच्चारण करके पी लें।
- प्रथम बार ॐ मुत्युभजाय नम:
- दूसरी बार ॐ नीलकण्ठाय: नम:
- तीसरी बार ॐ रूद्राय नम:
- चौथी बार ॐशिवाय नम:
- हाथ में फूल और चावल लेकर शिवजी का ध्यान करें और मन में ॐ नम: शिवाय मंत्र का जाप करें और चावल और फूल को शिवलिंग पर चढ़ा दें।
- इसके बाद ॐ नम: शिवाय का निरन्तर उच्चारण करते रहे। फिर हाथ में चावल और पुष्प लेकर ॐ पार्वत्यै नम:` मंत्र का उच्चारण कर माता पार्वती का ध्यान कर चावल पारा शिवलिंग पर चढ़ा दें।
- फिर मौली को और इसके बाद जनेऊ को पारद शिवलिंग पर चढ़ा दें।
- इसके पश्चात हल्दी और चन्दन का तिलक लगा दे। चावल अर्पण करे इसके बाद पुष्प चढ़ा दें। मीठे का भोग लगा दे।
- भांग, धतूरा और बेलपत्र शिवलिंग पर चढ़ा दें।
- अंत में शिव की आरती करे और प्रसाद आदि वितरित करें।
पारद शिवलिंग से होते हैं वास्तु दोष दूर
- पारद शिवलिंग को घर में रखने से सभी प्रकार के वास्तु दोष स्वत: ही दूर हो जाते हैं। साथ ही घर का वातावरण भी शुद्ध होता है। पारद शिवलिंग की स्थापना करके साधना करने पर स्वतः साधक की रक्षा होती रहती है। विशेष रूप से महाविद्या और काली साधकों को इसे अवश्य स्थापित करना चाहिए।
- पारद शिवलिंग साक्षात भगवान शिव का स्वरूप माना गया है। इसलिए इसे घर में स्थापित कर प्रतिदिन पूजन करने से किसी भी प्रकार के तंत्र का असर घर में नहीं होता और न ही साधक पर किसी तंत्र क्रिया का प्रभाव पड़ता है।
- यदि किसी को पितृ दोष हो तो उसे प्रतिदिन पारद शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए। इससे पितृ दोष समाप्त हो जाता है।
- अगर घर का कोई सदस्य बीमार हो जाए तो उसे पारद शिवलिंग पर अभिषेक किया हुआ पानी पिलाने से वह ठीक होने लगता है।
- पारद शिवलिंग की साधना से विवाह बाधा भी दूर होती है।