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Hindi News ›   Astrology ›   Predictions ›   Shani Pradosh Vrat September 2021 Date muhurat timings Vrat vidhi katha

Shani Pradosh Vrat 2021: भाद्रपद माह का पहला प्रदोष व्रत आज, जानें मुहूर्त, व्रत विधि और कथा

Sat, 04 Sep 2021 07:45 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रुस्तम राणा Updated Sat, 04 Sep 2021 07:45 AM IST
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Shani Pradosh Vrat September 2021 Date muhurat timings Vrat vidhi katha
भाद्रपद शनि प्रदोष व्रत 2021 - फोटो : अमर उजाला

भाद्रपद माह का पहला प्रदोष व्रत आज है। प्रदोष व्रत हर माह में त्रयोदशी तिथि के दिन रखा जाता है। शनिवार के दिन पड़ने के कारण इसे शनि प्रदोष व्रत जाता है। प्रदोष व्रत में भगवान शिव और मां पार्वती की आराधना की जाती है। वहीं शनि प्रदोष व्रत में शिव-पार्वती की पूजा के साथ-साथ शनि देव की भी पूजा की जाती है। ऐसा करने से शनि दोष से मुक्ति मिलती है। प्रदोष व्रत भगवान शिव के साथ चंद्रदेव से भी जुड़ा है। मान्यता है कि प्रदोष का व्रत सबसे पहले चंद्रदेव ने ही किया था। माना जाता है शाप के कारण चंद्र देव को क्षय रोग हो गया था। तब उन्होंने हर माह में आने वाली त्रयोदशी तिथि पर भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत रखना आरंभ किया था। जिसके शुभ प्रभाव से चंद्रदेव को क्षय रोग से मुक्ति मिली थी। इस व्रत को रखने वाले भक्तों के जीवन से दु:ख दरिद्रता भी दूर होती है। इस दिन प्रदोष काल में विधिवत्त तरीके से भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से हर मनोकामना पूर्ण होती है, सब संकट दूर हो जाते हैं और मान-सम्मान बढ़ता है।

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शनि प्रदोष व्रत पूजा मुहूर्त
त्रियोदशी तिथि का आरंभ- 4 सितंबर, 2021, शनिवार, सुबह 8:24 बजे
तिथि का समापन- 5 सितंबर रविवार, 8:21 बजे  

प्रदोष व्रत की पूजा विधि
त्रयोदशी तिथि के दिन सूरज उगने से पहले स्नान करके साफ़ वस्त्र धारण कर लें एवं व्रत का संकल्प करें। शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर अथवा घर पर ही बेलपत्र, अक्षत, दीप, धूप, गंगाजल आदि से भगवान शिव की पूजा करें। शिवजी की कृपा पाने के लिए भगवान शिव के मन्त्र ॐ नमः शिवाय का मन ही मन जप करते रहें। प्रदोष बेला में फिर से भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करने के बाद गंगाजल मिले हुए शुद्ध जल से भगवान का अभिषेक करें। शिवलिंग पर शमी, बेल पत्र, कनेर, धतूरा, चावल, फूल, धूप, दीप, फल, पान, सुपारी आदि अर्पित करें। इसके बाद शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें एवं शिव चालीसा का पाठ करें। तत्पश्चात कपूर प्रज्वलित कर भगवान की आरती कर भूल-चूक की क्षमा मागें।
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शनि प्रदोष व्रत कथा
प्राचीन समय में एक नगर में एक सेठ अपने परिवार के साथ निवास करता था। विवाह के काफी समय बाद भी उसे संतान सुख नहीं मिला। इससे सेठ और सेठानी दुखी थे। एक दिन दोनों ने तीर्थ यात्रा पर जाने का फैसला किया। शुभ मुहूर्त में दोनों तीर्थ यात्रा पर निकल पड़े। रास्ते में एक महात्मा मिले। दोनों ने उस महात्मा से आशीष लिया। ध्यान से विरक्त होने के बाद उस साधु ने दोनों की बातें सुनीं। फिर दोनों को शनि प्रदोष व्रत करने का सुझाव दिया। तीर्थ यात्रा से आने के बाद उन दोनों ने विधि विधान से शनि प्रदोष का व्रत किया। भगवान शिव की पूजा की। कुछ समय बाद सेठानी मां बनी और उसने एक बच्चे को जन्म दिया। शनि प्रदोष व्रत के प्रभाव से उन दोनों को संतान की प्राप्ति हुई।
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शनि दोष से मुक्ति पाने के लिए करें ये उपाय

  • शनि दोष से मुक्ति पाने के लिए शनि प्रदोष के दिन शनि स्त्रोत का पाठ करें। 
  • इस दिन कम से कम शनि मंत्र का एक माला जाप करें। 
  • बूंदी के लड्डू शनि देव को चढ़ाकर काली गाय को खिलाएं। 
  • तेल में चुपड़ी रोटी को काले कुत्ते को खिलाएं।
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