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Astrology: शनि चंद्रमा से बनता है अशुभ विष योग, जानिए 12 भावों में कैसा होता है इसका प्रभाव ?

Tue, 23 May 2023 11:45 AM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Tue, 23 May 2023 11:45 AM IST
सार

शनि चंद्र की युति से विष योग का निर्माण होता है। इसके अलावा अगर लग्न में बैठे चन्द्रमा पर शनि की दृष्टि हो तो भी इस योग का निर्माण होता है।

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Shani And Moon Yuti Impact In Kundali Know Negative Effects On 12 House In Hindi
शनि चंद्र की युति - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वैदिक ज्योतिष में शनि चंद्र की युति से विष योग का निर्माण होता है। इसके अलावा अगर लग्न में बैठे चन्द्रमा पर शनि की दृष्टि हो तो भी इस योग का निर्माण होता है। आज इस लेख में हम यह जानने की कोशिश करेंगे कि शनि चंद्रमा की इस युति का 12 भाव में क्या प्रभाव होगा।
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प्रथम भाव - यदि जातक के लग्न में यह युति हो तो अक्सर मौसमी बीमारी से घिरा रहता है। संकोची किस्म का होता है और अपनी बात खुलकर नहीं कह पाता है। 
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द्वितीय भाव - इस भाव में इस युति के होने से पिता की संपत्ति नहीं मिलती या उस पर विवाद हो जाता है। अपने खुद के काम में कोई ख़ास सफलता नहीं मिलती है। जातक नौकरी करे तो ही अच्छा है। 
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तृतीय भाव - इस भाव में विष योग हो तो जातक की भाइयों से नहीं बनती है। जातक अपने रिश्तो को लेकर बेहद भावुक होता है और ठगा जाता है। 

चौथा भाव - इस भाव में इस युति के कारण माता को कष्ट होता है। पारिवारिक कलह बनी रहती है। ह्रदय रोग की पूर्ण सम्भावना बनती है। 

पंचम भाव - इस भाव में शनि चंद्र विराजमान हो तो शिक्षा प्राप्ति में बाधा आती है। संतान के लिए कष्टकारी होता है। शेयर मार्किट में पैसा डूबने की संभावना होती है। 

छठा भाव - इस भाव में विष योग का निर्माण हो तो नौकर अच्छे नहीं मिलते है। मामा से विवाद होता है। शत्रुओं की साजिश का शिकार होने का भय रहता है। 


सप्तम भाव - इस भाव में यह युति हो तो जातक का जीवनसाथी बीमार रहता है। ससुराल के लोगों से नहीं बनती और मित्रों से कोई खास लाभ नहीं होता है। 

अष्टम भाव - इस भाव में विषयोग का निर्माण होने पर दुर्घटना का भय रहता है। आर्थिक पक्ष कमजोर रहता है। केतु का प्रभाव होने पर गुप्त विद्या में रूचि होती है और संसार से विरक्त होगा। 

नवम भाव - इस भाव में शनि चंद्र की युति से भाग्य में बाधा आती है। पिता के साथ नहीं बनती। जातक को यात्राओं में कष्ट होता है। 

दशम भाव - इस भाव में विष योग का निर्माण होने से कार्य स्थल पर शत्रु बन जाते है। इस  युति के कारण जातक की तरक्की देरी से होती है। 

एकादश भाव -  इस भाव में इस युति के कारण अधिकतर मित्र धोखा देते है और सच्चे प्रेम की तलाश रहती है। जातक के प्रेमी कभी भी कठिन समय में उसका साथ नहीं देते हैं। 

द्वादश भाव -  इस भाव में यह विष योग जातक को निराशा देता है। एकांत और अकेलपन का शिकार रहता है। राहु का प्रभाव हो तो जातक शराबी और बुरी आदतों वाला होगा।

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