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Chandra Grahan 2026: साल का पहला चंद्र ग्रहण आज, जानिए इसमें क्या करें और क्या न करें

Tue, 03 Mar 2026 07:37 AM IST
Vinod Shukla ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: Vinod Shukla Updated Tue, 03 Mar 2026 07:37 AM IST
सार

वर्ष 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 03 मार्च को लगेगा। इसका सूतक काल 3 मार्च को सुबह 6 बजकर 20 मिनट से प्रारंभ होकर शाम 6 बजकर 46 मिनट तक चलेगा। इस दौरान खाने-पीने से लेकर पूजा-पाठ तक कई कार्यों में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। 

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Lunar Eclipse 2026 Do's And Don'ts Chandra Grahan Mein Kya Karna Chahiye Or Kya Nahi Karna Chahiye
चंद्र ग्रहण 2026  - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण कल यानी 03 मार्च को लगने जा रहा है। फाल्गुन माह की पूर्णिमा के दिन पड़ने की वजह से चंद्र ग्रहण बेहद ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत में दिखने की वजह से चंद्र ग्रहण का सूतक भी मान्य होगा। पंचांग के अनुसार, चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026, मंगलवार को फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि पर लगेगा। भारतीय समय अनुसार चंद्र ग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर शुरू होगा और शाम को 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। कुल मिलाकर 3 घंटे 27 मिनट तक ये ग्रहण रहेगा।

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सूतक काल कब से कब तक रहेगा ?
ज्योतिष के अनुसार चंद्र ग्रहण का सूतक काल अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। साल का पहला चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य होगा। चंद्र ग्रहण के शुरू होने से 9 घंटे पहले सूतक लग जाएगा। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में शुभ कार्य करने से बचना चाहिए। सूतक काल 3 मार्च को सुबह 6 बजकर 20 मिनट से प्रारंभ होकर शाम 6 बजकर 46 मिनट तक चलेगा। इस दौरान खाने-पीने से लेकर पूजा-पाठ तक कई कार्यों में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। 
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चंद्रग्रहण में क्या करें ? 

  • इस दिन मंत्र जाप बेहद फलदायी होता है। भगवान शिव का महामृत्युंजय मंत्र और चंद्रमा का मंत्र ‘ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः’का जप करना चाहिए।
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  • इसके साथ ही आप अपने ईष्टदेव के मंत्रों का जाप भी कर सकते हैं । इस समय धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना चाहिए।  माना जाता है कि इससे मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।  
  • ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करना चाहिए, इससे शरीर और घर में फैली नकारात्मकता दूर होती है।  स्नान के बाद घर और मंदिर में गंगाजल का छिड़काव अवश्य करें ।
  • चंद्रग्रहण के बाद दान करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन चावल, दूध, घी, सफेद वस्त्र और चांदी का दान करने से चंद्र दोष दूर होते हैं और पितरों का आशीर्वाद मिलता है। 

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चंद्रग्रहण में क्या न करें ?

  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्रग्रहण का समय बेहद संवेदनशील और ऊर्जा परिवर्तन का काल माना जाता है। इस दौरान वातावरण में नकारात्मक प्रभाव बढ़ने की आशंका जताई जाती है, इसलिए विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
  • धार्मिक मान्यता के अनुसार ग्रहण के दौरान भोजन करना वर्जित माना गया है। कहा जाता है कि ग्रहण के समय वातावरण में सूक्ष्म जीवाणुओं की संख्या बढ़ जाती है, जिससे भोजन दूषित हो सकता है। 
  • ग्रहण शुरू होने से पहले भोजन में तुलसी के पत्ते डाल दिए जाते हैं, जिससे उसकी पवित्रता बनी रहे। 
  • ग्रहण काल में देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को स्पर्श नहीं करना चाहिए और घर के मंदिर को साफ कपड़े, विशेषकर लाल या पीले वस्त्र से आच्छादित कर देना उचित माना जाता है। 
  •  मान्यता है कि इस समय तुलसी, पीपल और बरगद जैसे पवित्र वृक्षों को भी नहीं छूना चाहिए क्योंकि इसे अशुभ प्रभाव का कारण माना जाता है। 
  •  ग्रहण के दिन सकारात्मक वातावरण बनाए रखना जरूरी है, इसलिए नकारात्मक सोच या कटु वचन बोलने वाले लोगों से दूरी रखना बेहतर माना गया है।  

 

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