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Guru Uday 2025: देवगुरु बृहस्पति मिथुन राशि में हुए उदय, जानें मिथुन राशि पर प्रभाव
Wed, 09 Jul 2025 06:36 PM IST
विनोद शुक्ला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Wed, 09 Jul 2025 06:36 PM IST
सार
Guru Uday 2025: मिथुन राशि के जातकों के लिए देवगुरु बृहस्पति सातवें और और दशम भाव के स्वामी होते हैं और अब गुरु का उदय आपकी राशि के पहले भाव में हुआ है।
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गुरु हुए मिथुन राशि में उदित
- फोटो : adobe stock
विस्तार
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Guru Uday 2025: शुभ ग्रह और देवताओं के गुरु बृहस्पति करीब एक महीने तक मिथुन राशि में अस्त रहते हुए 09 जुलाई 2025 को रात 10 बजकर 50 मिनट पर उदित हो गए हैं। ज्योतिष में गुरु का उदय होना अच्छा माना जाता है। हिंदू धर्म में गुरु को शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण माने जाते हैं। जब गुरु अस्त अवस्था में होते हैं तो विवाह जैसे मांगलिक और शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। गुरु के अस्त होने को तारा डूबना भी कहा जाता है। गुरु के उदय होने का प्रभाव सभी 12 राशियों के जातकों के जीवन पर देखने को मिलेगा। आइए जानते हैं गुरु के उदय होने से मिथुन राशि के जातकों पर किस तरह का प्रभाव पड़ेगा इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं
मिथुन राशि पर गुरु के उदय होने का प्रभाव
मिथुन राशि के जातकों के लिए देवगुरु बृहस्पति सातवें और और दशम भाव के स्वामी होते हैं और अब गुरु का उदय आपकी राशि के पहले भाव में हुआ है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सप्तम और दशम भाव के स्वामी का उदय होना आपके कार्यक्षेत्र में ऊंचे मुकाम को हासिल कर सकते हैं। रोजगार के क्षेत्र में आ रही समस्याएं दूर हो सकती हैं। वहीं जिन लोगों के विवाह में देरी हो रही है उनके लिए विवाह के प्रस्ताव आ सकते हैं। जीवन में सकारात्मकता आ सकती है।
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गुरु का ज्योतिषीय महत्व
मिथुन राशि पर गुरु के उदय होने का प्रभाव
मिथुन राशि के जातकों के लिए देवगुरु बृहस्पति सातवें और और दशम भाव के स्वामी होते हैं और अब गुरु का उदय आपकी राशि के पहले भाव में हुआ है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सप्तम और दशम भाव के स्वामी का उदय होना आपके कार्यक्षेत्र में ऊंचे मुकाम को हासिल कर सकते हैं। रोजगार के क्षेत्र में आ रही समस्याएं दूर हो सकती हैं। वहीं जिन लोगों के विवाह में देरी हो रही है उनके लिए विवाह के प्रस्ताव आ सकते हैं। जीवन में सकारात्मकता आ सकती है।
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गुरु का ज्योतिषीय महत्व
- - ज्योतिष में गुरु ग्रह को शुभ ग्रह माना जाता है।
- - सभी 12 राशियों में गुरु ग्रह दो राशियों का स्वामित्व प्राप्त है। ये राशियां हैं- धनु और मीन
- - गुरु धन, शिक्षा, धर्म, ज्ञान, संतान और विवाह के कारक ग्रह होते हैं।
- - गुरु कर्क राशि में उच्च के होते हैं और मकर राशि में नीच के होते हैं।
- - गुरु को पांचवीं, सातवीं और नौवी द्दष्टि मिली हुई है।
- - गुरु विशाखा, पूर्वाभाद्रपद और पुनर्वसु नक्षत्रों के स्वामी होंते हैं।
- - कालपुरुष की कुंडली के अनुसार गुरु द्वादश और नवम भाव पर पर अपनी आधिपत्य रखते हैं।
- - जब किसी जातक की कुंडली में गुरु धन भाव में बैठते हैं तो ऐसा व्यक्ति बहुत ही धनवान और अमीर होता है। वहीं अगर गुरु कुंडली के पंचम भाव में बैठे या फिर अन्य दूसरे भाव में बैठकर पंचम भाव पर द्दष्टि रखे तो जातक को उच्च शिक्षा और योग्य संतान की प्राप्ति होती है।
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