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मोक्षदायिनी एकादशी, कैसे करें व्रत और पूजा, मिलता है नर्क से छुटकारा
Mon, 16 Dec 2019 04:14 PM IST
संदीप भट्ट
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: संदीप भट्ट
Updated Mon, 16 Dec 2019 04:14 PM IST
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मार्गशीर्ष महीने के शुक्लपक्ष की एकादशी को भारतीय धर्म शास्त्रों में मोक्षदायिनी एकादशी के रूप में जाना जाता है। मोक्षदा एकादशी का धार्मिक महत्व पितरों को मोक्ष दिलाने वाली एकादशी के रूप में भी है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से व्रत करने वाले व्यक्ति के साथ ही उसके पितरों के लिए भी मोक्ष के द्वार खुल जाते हैं।
क्यों कहा जाता है मोक्षदायिनी श्रीकृष्ण ने अर्जुन को क्या दिया था उपदेश
मोक्षदा एकादशी के व्रत की विधि बहुत सरल है। इस दिन सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर घर के मंदिर की सफाई करें और पूरे घर में गंगाजल छिड़कें। पूजाघर में भगवान को गंगाजल से स्नान कराएं। उन्हें वस्त्र अर्पित करें।
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इसके बाद रोली और अक्षत से तिलक करें। फूलों से भगवान का श्रृंगार करें। भगवान को फल और मेवे का भोग लगाएं। सबसे पहले भगवान गणपति और फिर माता लक्ष्मी के साथ श्रीहरि की आरती करें। भगवान विष्णु को तुलसी के पत्ते अवश्य अर्पित करें।
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क्यों कहा जाता है मोक्षदायिनी श्रीकृष्ण ने अर्जुन को क्या दिया था उपदेश
इसे मोक्षदायिनी इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश अर्जुन को दिया था। द्वापर युग में महाभारत युद्ध के दौरान जब अर्जुन अपने सगे संबंधियों पर बाण चलाने से घबराने लगे तब श्रीकृष्ण ने उन्हें जीवन, आत्मा और कर्तव्य के बारे में विस्तार से समझाया था।
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मोक्षदा एकादशी के व्रत की विधि बहुत सरल है। इस दिन सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर घर के मंदिर की सफाई करें और पूरे घर में गंगाजल छिड़कें। पूजाघर में भगवान को गंगाजल से स्नान कराएं। उन्हें वस्त्र अर्पित करें।
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इसके बाद रोली और अक्षत से तिलक करें। फूलों से भगवान का श्रृंगार करें। भगवान को फल और मेवे का भोग लगाएं। सबसे पहले भगवान गणपति और फिर माता लक्ष्मी के साथ श्रीहरि की आरती करें। भगवान विष्णु को तुलसी के पत्ते अवश्य अर्पित करें।