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ज्येष्ठ माह: 10 जून को शनि जयंती, ज्येष्ठ अमावस्या औेर सूर्यगहण एक साथ
Wed, 02 Jun 2021 05:58 AM IST
विनोद शुक्ला
मदन गुप्ता सपाटू, ज्योतिषाचार्य, चंडीगढ़
मदन गुप्ता सपाटू, ज्योतिषाचार्य, चंडीगढ़
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Wed, 02 Jun 2021 05:58 AM IST
सार
शनिदेव को न्याय का देवता माना जाता है। शनिदेव व्यक्ति को उसके कर्मों के हिसाब से फल देते हैं। हिंदू पंचांग में ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को शनि जयंती मनाई जाती है।
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ज्योतिष में शनि को बीमारी, अस्पताल, दवा पर खर्चे, मृत्यु आदि से भी जोड़ा गया है।
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विस्तार
इस बार ज्येष्ठ अमावस गुरुवार के दिन पड़ने ,शनि जयंती तथा सूर्य ग्रहण, धृति तथा शूल योग के अधीन एक ही दिन पड़ने से 10 जून का दिन विशेष होगा।
सूर्य ग्रहण
साल का पहला चंद्रग्रहण 26 मई को था। वहीं दूसरा ग्रहण 10 जून 2021, गुरुवार को पड़ रहा है। यह एक सूर्य ग्रहण होगा जो आंशिक रूप से भारत में दिख सकता है। ग्रहण दोपहर 1 बजकर 42 मिनट पर शुरू होगा जो शाम 6 बजकर 41 मिनट पर समाप्त होगा।
सूतक काल नहीं होगा
यह ग्रहण कई जगह पर दिखाई देगा लेकिन भारत में नहीं दिखेगा। ऐसे में धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा।
कहां दिखाई देगा सूर्य ग्रहण?
इस साल वलयाकार सूर्य ग्रहण ग्रीनलैंड, उत्तर-पूर्वी कनाडा, उत्तरी ध्रुव और रूसी फास्ट ईस्ट के कुछ हिस्सों से दिखाई देगा। जबकि यूरोप, उत्तरी अमेरिका, एशिया, आर्कटिक और अटलांटिक क्षेत्रों में आंशिक सूर्य ग्रहण होगा। भारत में अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख के कुछ हिस्सों को छोड़कर सूर्य ग्रहण 2021 दिखाई नहीं देगा। जबकि ग्रीनलैंड में स्थानीय समय के अनुसार, दोपहर के समय चरम पर पहुंचने पर ‘रिंग ऑफ फायर’दिखाई देगा। वहां से ये उत्तरी ध्रुव और साइबेरिया में दिखाई देगा।
कोरोना, सूर्यग्रहण और वक्री शनि
ज्योतिष में शनि को बीमारी, अस्पताल, दवा पर खर्चे, मृत्यु आदि से भी जोड़ा गया है। जैसे ही 2019 में गुरु- शनि का संगम हुआ, कोरोना का जन्म हो गया। ज्योतिषी एक जगह आकलन ठीक नहीं कर पाए। गुरु, राहु के नक्षत्र में था जो धोखा देता है। यही 2021 के आरंभ में लगा कि कोरोना जा रहा है, जिंदगी पटरी पर आ रही है ,परंतु राहु ने अपना असली चेहरा दिखा दिया और रूप बदल बदल कर मानव जीवन को नुकसान पहुंचाता गया। 23 मई 2021 को शनि वक्री हो गए हैं। 10 जून का दिन भी महत्वपूर्ण है। अब संक्रमण में कुछ कमी दिखनी आरंभ हो जाएगी। मान्यता है वक्री होने से शनि कमजोर पड़ जाते हैं। शनि महाराज 141 दिन उल्टे चलेंगे। धनु, मकर और कुंभ वालों पर साढ़ेसाती चल रही है और मिथुन व तुला राशि पर शनि की ढैय्या चल रही है। 11 अक्तूबर 2021 से शनि मार्गी हो जाएंगे और 2023 तक मकर राशि में ही रहेंगे। अक्तूबर 2021 में कोरोना फिर सिर उठा सकता है। वैज्ञानिक इसे तीसरी लहर भी कह सकते हैं। भारत इस महामारी से लड़ने में पूर्ण सक्षम रहेगा। परंतु कोरोना से मुक्ति अप्रैल 2022 से मिलेगी हालांकि इसका कमोबेश प्रभाव 2023 तक रहेगा।
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शनि जयंती
शनिदेव को न्याय का देवता माना जाता है। शनिदेव व्यक्ति को उसके कर्मों के हिसाब से फल देते हैं। हिंदू पंचांग में ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को शनि जयंती मनाई जाती है। इस दिन पूजा-अर्चना करने से शनिदेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
शनि जयंती शुभ मुहूर्त
शनि जयंती बृहस्पतिवार, जून 10, 2021 को
अमावस्या तिथि आरंभ: 14:00:25 (9 जून 2021)
अमावस्या तिथी समाप्ति: 16:24:10 (10 जून 2021)
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सूर्य ग्रहण
साल का पहला चंद्रग्रहण 26 मई को था। वहीं दूसरा ग्रहण 10 जून 2021, गुरुवार को पड़ रहा है। यह एक सूर्य ग्रहण होगा जो आंशिक रूप से भारत में दिख सकता है। ग्रहण दोपहर 1 बजकर 42 मिनट पर शुरू होगा जो शाम 6 बजकर 41 मिनट पर समाप्त होगा।
सूतक काल नहीं होगा
यह ग्रहण कई जगह पर दिखाई देगा लेकिन भारत में नहीं दिखेगा। ऐसे में धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा।
कहां दिखाई देगा सूर्य ग्रहण?
इस साल वलयाकार सूर्य ग्रहण ग्रीनलैंड, उत्तर-पूर्वी कनाडा, उत्तरी ध्रुव और रूसी फास्ट ईस्ट के कुछ हिस्सों से दिखाई देगा। जबकि यूरोप, उत्तरी अमेरिका, एशिया, आर्कटिक और अटलांटिक क्षेत्रों में आंशिक सूर्य ग्रहण होगा। भारत में अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख के कुछ हिस्सों को छोड़कर सूर्य ग्रहण 2021 दिखाई नहीं देगा। जबकि ग्रीनलैंड में स्थानीय समय के अनुसार, दोपहर के समय चरम पर पहुंचने पर ‘रिंग ऑफ फायर’दिखाई देगा। वहां से ये उत्तरी ध्रुव और साइबेरिया में दिखाई देगा।
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कोरोना, सूर्यग्रहण और वक्री शनि
ज्योतिष में शनि को बीमारी, अस्पताल, दवा पर खर्चे, मृत्यु आदि से भी जोड़ा गया है। जैसे ही 2019 में गुरु- शनि का संगम हुआ, कोरोना का जन्म हो गया। ज्योतिषी एक जगह आकलन ठीक नहीं कर पाए। गुरु, राहु के नक्षत्र में था जो धोखा देता है। यही 2021 के आरंभ में लगा कि कोरोना जा रहा है, जिंदगी पटरी पर आ रही है ,परंतु राहु ने अपना असली चेहरा दिखा दिया और रूप बदल बदल कर मानव जीवन को नुकसान पहुंचाता गया। 23 मई 2021 को शनि वक्री हो गए हैं। 10 जून का दिन भी महत्वपूर्ण है। अब संक्रमण में कुछ कमी दिखनी आरंभ हो जाएगी। मान्यता है वक्री होने से शनि कमजोर पड़ जाते हैं। शनि महाराज 141 दिन उल्टे चलेंगे। धनु, मकर और कुंभ वालों पर साढ़ेसाती चल रही है और मिथुन व तुला राशि पर शनि की ढैय्या चल रही है। 11 अक्तूबर 2021 से शनि मार्गी हो जाएंगे और 2023 तक मकर राशि में ही रहेंगे। अक्तूबर 2021 में कोरोना फिर सिर उठा सकता है। वैज्ञानिक इसे तीसरी लहर भी कह सकते हैं। भारत इस महामारी से लड़ने में पूर्ण सक्षम रहेगा। परंतु कोरोना से मुक्ति अप्रैल 2022 से मिलेगी हालांकि इसका कमोबेश प्रभाव 2023 तक रहेगा।
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शनि जयंती
शनिदेव को न्याय का देवता माना जाता है। शनिदेव व्यक्ति को उसके कर्मों के हिसाब से फल देते हैं। हिंदू पंचांग में ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को शनि जयंती मनाई जाती है। इस दिन पूजा-अर्चना करने से शनिदेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
शनि जयंती शुभ मुहूर्त
शनि जयंती बृहस्पतिवार, जून 10, 2021 को
अमावस्या तिथि आरंभ: 14:00:25 (9 जून 2021)
अमावस्या तिथी समाप्ति: 16:24:10 (10 जून 2021)
शनिदेव को न्याय का देवता माना जाता है। शनिदेव व्यक्ति को उसके कर्मों के हिसाब से फल देते हैं। हिंदू पंचांग में ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को शनि जयंती मनाई जाती है।