ज्योतिष शास्त्र एक विज्ञान है और विज्ञान तर्कों व तथ्यों पर आधारित होता है। हमारे ऋषि-मुनियों ने ज्योतिष शास्त्र में निहित ज्ञान से मनुष्य जीवन के कल्याण में महती भूमिका निभाई है। ज्योतिष विज्ञान कहता है कि किसी व्यक्ति की कुंडली से उसके भाग्य को जाना जा सकता है। लेकिन आप में से कई लोगों को जेहन में यह सवाल जरूर आया होगा कि क्या वाकई कुंडली से किसी के भाग्य को समझा जा सकता है। तो चलिए इस बारे में जानते हैं विस्तार से..
आपके भाग्य को समझने में कितनी कारगर होती है कुंडली?
जन्म कुंडली किसी व्यक्ति के जन्म विवरण का लेखा-जोखा होता है। इसमें एक प्रकार से व्यक्ति के जन्म के समय आकाश मंडल में ग्रह एवं नक्षत्र की स्थिति का सचित्र वर्णन होता है। कुंडली के द्वारा ही व्यक्ति का नामकरण, उपनयन, विवाह आदि संस्कार किए जाते हैं। जन्मपत्रिका को देखकर ही ज्योतिषाचार्य उस व्यक्ति के स्वभाव, नौकरी-पेशे, आर्थिक, धन, परिवार, विवाह एवं प्रेम जीवन के अलावा अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं से जुड़ी सटीक भविष्यवाणी कर सकता है।
जन्मपत्री कैसे बनती है या कैसे बनाई जाती है। इस सवाल के जवाब के लिए तीन चीजें आवश्यक होती हैं। इन तीन चीजों में पहली चीज है व्यक्ति के जन्म का समय। यानि व्यक्ति का जन्म किस समय हुआ था। दूसरी चीज है व्यक्ति के जन्म की तारीख अर्थात वह कब पैदा हुआ था और तीसरी चीज़ है व्यक्ति के पैदा होने का जन्म स्थान। इन्हीं जन्म विवरण के आधार पर जन्म कुंडली तैयार की जाती है।
जीवन में कभी भी परिस्थितियां एक समान नहीं होती है। व्यक्ति के जीवन में कभी खुशी की धूप तो कभी गम के बादल जरूर आते हैं। व्यक्ति अपने जीवन में कभी सफलता पाता है तो कभी उसे संघर्षों का सामना करना पड़ता है। व्यक्ति के कठिन समय में ही कुंडली महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। कठिन समय में व्यक्ति के ग्रह-नक्षत्रों का बुरा प्रभाव पड़ता है। ऐसे में कुंडली को देखकर संबंधित ग्रहों के लिए उपाय कर बुरे प्रभावों से बचा जा सकता है।