सभी नौ ग्रहों में शनि को न्यायाधीश की पद प्राप्त है। ज्योतिष में शनि के बारे में कहा जाता है कि शनि जिस किसी की कुंडली के अशुभ भाव में आकर बैठ जाते है उसके बुरे दिन शुरू हो जाते हैं। उस व्यक्ति को कई तरह की बीमारियां एक साथ लगने लगती है। बनते हुए काम बिगड़ने लगते हैं।
इस तरह मिलते हैं शनि साढ़ेसाती-ढैय्या के अशुभ संकेत, ये पांच राशियां हैं इसके प्रभाव में
24 जनवरी 2020 से शनि मकर राशि में भ्रमण कर रहे हैं। शनि जब-जब राशि बदलते हैं तब-तब कई राशियों पर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या लग जाती है। आइए जानते हैं क्या होती है शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या और किन राशियों पर है इसका प्रभाव
शनि की साढ़ेसाती
जब शनि का गोचर किसी एक राशि में होता है तो शनि उस राशि में ढाई साल तक रहते हैं। ढाई साल के बाद ही शनि का राशि परिवर्तन दूसरी राशि में होता है। ज्योतिष गणना के अनुसार चंद्र राशि से जब शनि 12वें भाव, पहले भाव व द्वितीय भाव से निकलते हैं। उस अवधि को शनि की साढ़े साती कहा जाता है।
शनि जिस राशि में गोचर करते हैं तो राशि क्रम के हिसाब से उस राशि के आगे और पीछे वाली राशि पर भी अपना असर डालते हैं। इस तरह से शनि एक राशि पर साढ़े सात साल तक रहते हैं। इस साढ़े सात साल के समय को ही शनि की साढ़ेसाती कहा जाता है। फिर जैसे-जैसे शनि दूसरी राशि में आगे बढ़ता है साढ़ेसाती उतरती जाती है।
शनि की ढैय्या
शनि जब गोचर में जन्म राशि से चतुर्थ और अष्टम भाव में रहता है तब इसे शनि की ढैय्या कहते है। शनि की ढय्या एक राशि पर साढ़े सात साल और दूसरी पर लगभग 16 साल में आती है। शनि के ढैय्या किसी राशि पर इसको पता लगाने के लिए शनि जिस राशि में रहता है उससे क्रम अनुसार पहले की चौथी और बाद वाली छठी राशि पर शनि की ढैय्या रहती है।