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नेपाल में शवों की पहचान बड़ी चुनौती, DNA- निशानों से होगी अब पहचान!

वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Updated Tue, 01 Sep 2026 01:58 AM IST

नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ के बाद लापता लोगों की तलाश लगातार जारी है। इस बीच पोखरा में शवों की पहचान को लेकर सामने आया एक मामला बेहद गंभीर और परेशान करने वाला है। पोखरा एकेडमी ऑफ हेल्थ साइंसेज में रखे गए शव नंबर 1003 पर तीन अलग-अलग परिवारों ने दावा किया है। इनमें बर्दिया के हाइड्रोपावर कर्मचारी गोपाल दहित और रुपनदेही के पर्यटक गाइड दामोदर बस्याल के परिवार भी शामिल हैं। एक ही शव पर अलग-अलग परिवारों के दावे के बाद उसकी पहचान को लेकर विवाद खड़ा हो गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दोनों परिवार अब डीएनए जांच कराने पर सहमत हुए हैं, ताकि वैज्ञानिक तरीके से यह पता लगाया जा सके कि शव वास्तव में किसका है। इस घटना ने बाढ़ के बाद बरामद किए जा रहे शवों की पहचान की चुनौती को एक बार फिर सामने ला दिया है।

26 अगस्त को नेपाल के कई इलाकों में आई बाढ़ और उससे पैदा हुए हालात में सैकड़ों लोगों की जान जाने की खबर है, जबकि हजारों लोग लापता बताए गए हैं। तेज बहाव और बाढ़ के पानी के कारण कई शव अपने मूल स्थान से बहकर काफी दूर चले गए। अलग-अलग जिलों और इलाकों से बरामद किए जा रहे शवों को अस्पतालों और संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों में पहुंचाया जा रहा है, जहां उन्हें सुरक्षित रखा जा रहा है और उनकी पहचान की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। हालांकि, कई मामलों में शवों की हालत इतनी खराब है कि परिजनों के लिए उन्हें देखकर पहचानना बेहद मुश्किल हो रहा है। ऐसे हालात में पुलिस और प्रशासन पारंपरिक पहचान के तरीकों के साथ वैज्ञानिक प्रक्रियाओं का भी सहारा ले रहे हैं।

परिवारों से मिली जानकारी के आधार पर शवों की तस्वीर, चेहरे की बनावट, शरीर की लंबाई और संरचना, दांत, कान, होंठ तथा शरीर पर मौजूद अन्य पहचान चिन्हों की जांच की जा रही है। कपड़ों और व्यक्तिगत सामान के आधार पर भी पहचान करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन बाढ़ की भयावहता के कारण कई मामलों में ये तरीके पर्याप्त साबित नहीं हो रहे हैं। पोखरा में शव नंबर 1003 को लेकर सामने आया विवाद इसी चुनौती का उदाहरण है। एक ही शव पर अलग-अलग परिवारों के दावे ने अधिकारियों के सामने भी पहचान की प्रक्रिया को लेकर मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब डीएनए परीक्षण के परिणाम से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि शव किस परिवार के सदस्य का है। नेपाल में जारी राहत और बचाव अभियान के साथ-साथ लापता लोगों की तलाश और बरामद शवों की पहचान का काम भी बड़ी प्राथमिकता बना हुआ है। प्रशासन के सामने चुनौती सिर्फ शव बरामद करने की नहीं, बल्कि उन्हें सही परिवार तक पहुंचाने की भी है, ताकि पीड़ित परिवारों को अपने प्रियजनों के बारे में निश्चित जानकारी मिल सके।

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