केदारनाथ के तीर्थपुरोहितों की इष्ट देवी दक्षिण काली ने देवप्रयाग संगम पर पहली बार पहुंचकर यहां निशानों के साथ स्नान किया व भक्तों को आशीर्वाद दिया। सिद्धपीठ कालीमठ से जुड़ी दक्षिण काली की डोली रुद्रप्रयाग जिले के फली फासट( लमगौड़ी) गांव से यमुनोत्री, गंगोत्री, बदरीनाथ की यात्रा पर निकली है।बुधवार शाम घड़ियालो, रणसिंहा व ढोल दमाऊ के साथ देवी की डोली लगभग सौ महिला पुरुष श्रद्धालुओं के साथ पहली बार देवप्रयाग संगम पहुंची। यहां विधि विधान के साथ डोली व निशानों का स्नान हुआ। केदारनाथ के तीर्थपुरोहित व समिति अध्यक्ष अनुसूया प्रसाद शुक्ला ने बताया लमगौड़ी की दक्षिण काली का इतिहास सिद्ध पीठ कालीमठ से गहरा जुड़ा है। ऊखीमठ ब्लॉक स्थित यह शक्तिपीठ अनेक सिद्ध जनों की तपस्थली रही है। असुर रक्तबीज को मारने के लिए मां ने काली का रूप धारण किया था। लमगौड़ी में मां काली के शांत स्वरूप की पूजा होती है। देवप्रयाग स्नान के बाद डोली हरिद्वार में स्नान के लिए रवाना हो गई। माँ दक्षिण काली की डोली का देवप्रयाग में बदरीनाथ धाम के तीर्थपुरोहितो द्वारा आस्था भक्ति के साथ स्वागत किया गया। संगम स्थल पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोगो सहित विभिन्न प्रदेशों के तीर्थयात्रियों ने डोली दर्शन कर आशीर्वाद लिया।