दशहरे पर नेहरू स्टेडियम में इस बार रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले नए अंदाज में नजर आएंगे। वर्षों से चली आ रही परंपरा में बदलाव करते हुए इस बार तीनों पुतलों को पैरों के सहारे खड़ा किया जाएगा। इससे पहले पुतलों का धड़ शंकु के आकार में बनाकर उन्हें सीधे जमीन पर टिकाया जाता था। करीब 40 साल से पुतले बनाने के काम में जुटा पुरकाजी का एक परिवार अब अपनी अगली पीढ़ी के साथ इस कला की विरासत आगे बढ़ा रहा है। तीनों पुतले तैयार करने के लिए छह कारीगरों की टीम पिछले 25 दिनों से लगातार काम कर रही है। करीब 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है। पुतलों का बाहरी ढांचा बांस से तैयार किया जा चुका है। अब उनके चेहरे बनाने और बाकी काम को अंतिम रूप देने की तैयारी है। दशहरे की सुबह तक पुतलों को पूरी तरह तैयार करने का लक्ष्य है। एक लाख 11 हजार रुपये आएगी लागत - कारीगर समीर ने बताया कि इस बार रावण का 60 फीट, कुंभकरण का 45 फीट और मेघनाथ का 40 फीट ऊंचा पुतला बनाया जा रहा है। तीनों पुतलों को तैयार करने में करीब एक लाख 11 हजार रुपये की लागत आएगी। समीर के साथ उनके भाई आकिब, सहयोगी संतराम समेत छह कारीगर काम में जुटे हैं। समीर ने बताया कि उनका परिवार करीब 40 साल से रावण के पुतले बनाने का काम कर रहा है। उन्होंने यह कला अपने पिता शहनवाज से सीखी। अब वह अपने भाई और अन्य सहयोगियों के साथ इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। परिवार के सदस्य पंजाब के लुधियाना, हरिद्वार के बीएचईएल मैदान और राजस्थान के कोटा समेत कई शहरों में पुतले बना चुके हैं। उनके मुताबिक, वह 200 फीट तक ऊंचे पुतले भी तैयार कर चुके हैं।