परमार्थ निकेतन में आयोजित पांच दिवसीय मां शबरी रामलीला का भव्य समापन हो गया। परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानंद सरस्वती के नेतृत्व में हुए इस आयोजन में जनजातीय और आदिवासी कलाकारों ने अपनी अद्भुत प्रस्तुतियों से रामभक्ति, लोक संस्कृति और प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया। इस दौरान चिदानंद महाराज ने कहा कि मां शबरी का जीवन श्रद्धा, धैर्य और निष्काम प्रेम का प्रतीक है, और जल-जंगल-जमीन के संरक्षण की जनजातीय संस्कृति हमारी सनातन धरोहर है। समापन अवसर पर बेहतरीन प्रस्तुतियां देने वाले कलाकारों और आयोजकों राहुल, हितेश, चंचल, डॉ. अनु, प्रवीण को रुद्राक्ष का पौधा और अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया गया।