गंगोलीहाट में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं किस कदर दम तोड़ रही हैं, इसका उदाहरण पीएचसी कंडारीछीना है। यहां डॉक्टर की तैनाती तो नहीं हुई, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अपने अनुभव से मरीजों को दवा रहे थे। बीते दिनों उनकी सेवानिवृत्ति के बाद दवा मिलना भी बंद हो गया। विभाग ने अस्पताल में ताला लगाकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। मंगलवार को मरीज दवा लेने अस्पताल पहुंचे लेकिन ताला लगा होने से उन्हें निराश लौटना पड़ा। गंगोलीहाट विकासखंड के खेतीगांव, इटावा, टुंटाचोड़ा, दुगईआगर, सुन्यूड़ा, ज्वाल, बोकटी, खितोली, धोलानी, गेरू, बड़ीमुना, बैठाना, भैरू, डोवालखेत, अंबाला, दुगईक्यूरी, बरुड़ा, चिलतोला, बोड़ी, मंखोला, सौंणा, भुनार, बसौड़ा, मल्लाधूरा, ल्वेसर सहित आसपास के 30 गांवों की 10 हजार से अधिक की आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए पीएचसी कंडारीछीना खोला गया है। वर्ष 2018 में यहां तैनात चिकित्सक ने नौकरी छोड़ दी। तब से आज तक यहां कोई डॉक्टर तैनात नहीं किया गया। व्यस्था के तहत फार्मासिस्ट की तैनाती कर सप्ताह में तीन उन्हें अस्पताल चलाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। अन्य दिनों यहां तैनात एकमात्र चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अपने अनुभव से मरीजों को दवा देने का काम कर रहे थे। बीते दिनों वह सेवानिवृत्त हो गए तो स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल में ताले लगाकर अपनी जिम्मेदारी निभा दी। अब इस अस्पताल के ताले खोलने वाला भी कोई नहीं है और क्षेत्र के मरीजों को इलाज तो दूर मामूली दवा मिलना भी बंद हो गया है। मंगलवार को कुछ लोग और बीमार बच्चे दवा के लिए अस्पताल पहुंचे। यहां ताले लटकने से उन्हें बैरंग लौटना पड़ा। चिकित्सक की तैनाती न होने से क्षेत्र के लोगों में खासा आक्रोश है।