साहब, हमारे गांव में आपदा आई है। पहाड़ टूटने के बाद लगातार भूस्खलन हो रहा है। ऐसे में हमें बेघर होना पड़ा है। परिवार की सुरक्षा के लिए हमने अपने घरों को छोड़ दिया है। हमारा भी सुरक्षित विस्थापन कर दो। यह कहा कलक्ट्रेट पहुंची पाली गांव की महिलाओं और अन्य ग्रामीणों ने। उन्होंने प्रदर्शन किया और इसके बाद जनता दरबार में विस्थापन की गुहार लगाई। पाली गांव की महिलाएं और अन्य ग्रामीण ग्राम प्रधान लोकेश कुमार के नेतृत्व में कलक्ट्रेट पहुंचे और विस्थापन की मांग पर प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि बीते चार सितंबर को भारी बारिश से उनके गांव के पीछे पहाड़ टूट गया। मलबा और बोल्डर उनके घरों तक पहुंच गए। तब से यहां लगातार भूस्खलन जारी है इससे 30 परिवार खतरे में आ गए हैं। हालात यह हैं कि आपदा के खतरे को देखते हुए उन्होंने अपने घर छोड़कर रिश्तेदारों के यहां शरण लेनी पड़ी है। वहीं कई परिवार पंचायत घर में रह रहे हैं। घरों में जाने से भी उन्हें डर लग रहा है। यदि उन्होंने इन घरों में रहना शुरू किया तो इससे बड़ी घटना हो सकती है। महिलाओं ने कहा कि वे बेघर हो गई हैं। उनके परिवार की सुरक्षा के लिए उनका सुरक्षित विस्थापन जरूरी है। कहीं जगह मिल जाए तो वे अपना ठिकाना वहां बना लेंगी। चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनका विस्थापन नहीं हुआ तो वे कलक्ट्रेट के बाहर डेरा डालने के लिए मजबूर होंगे। प्रदर्शन करने वालों में गंगा देवी, जयंती देवी, जसू देवी, मुन्नी देवी, गोविंदी देवी, बसंत राम, अर्जुन सिंह, ललित राम, पूरन सिंह बसेड़ा आदि शामिल रहे।