दशहरा पर रावण वध (दहन) होने के बाद भी चंडौस के वाशिंदे रावण को सम्मान देने की परंपरा को 87 साल से पूरी शिद्दत के साथ निभाते चले आ रहे हैं। इसी के तहत सोमवार को रामलीला के मंच पर हवन कर रावण की तेरहवीं (त्रयोदशी संस्कार) करते हुए 13 ब्राह्मणों को ब्रह्मभोज कराया गया। उन्हें दान-दक्षिणा और परोसा भी भेंट किया गया।