रायबरेली में दीवानी कचहरी में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन हुआ। इस दौरान परिवार न्यायालय में दहेज, पारिवारिक कलह के चलते अलग हुए दंपतियों ने एक साथ फिर रहने की हामी भरी। प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय भूपेंद्र राय और जिला जज अमित पाल सिंह ने सभी दंपतियों से हंसी खुशी रहने के लिए कहा। 35 वैवाहिक जोड़ों ने साथ रहने के लिए आपस में सुलह की। इसके अलावा अन्य मामलों का भी राष्ट्रीय लोक अदालत में निस्तारण किया गया। राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन होने से शहर से लेकर देहात क्षेत्रों के बड़ी संख्या में लोगों ने कचहरी पहुंचकर मामले का निस्तारण कराया। पतउवा मजरे आशापुर निवासी संतोष और उनकी पत्नी निशा के बीच दहेज उत्पीड़न को लेकर विवाद था। मामला परिवार न्यायालय में चल रहा था। निशा का आरोप था कि दहेज की खातिर उनके साथ मारपीट की जाती है। सुलह कराने पर दोनों के बीच की दूरियां कम हो गई। संतोष ने भरोसा दिया कि न तो अब वह कभी दहेज मांगेंगे और न ही निशा के साथ मारपीट करेंगे। हंसी-खुशी दोनों को घर भेजा गया। राही निवासी प्रवीण कुमार की शादी महराजगंज कोतवाली क्षेत्र के थुलेंडी की शांति गुप्ता उर्फ पूर्णिमा के साथ हुई थी। शादी के कुछ दिन बाद पारिवारिक कलह के चलते दोनों के रास्ते अलग गए। मामला कोर्ट पहुंचा तो दंपती में सुलह करने की कोशिश की गई। आखिर दोनों एक साथ फिर रहने के लिए हामी भरी। सरेनी निवासी अनूप तिवारी और पिंकी के बीच भी मतभेद था। परिवार न्यायालय में पिंकी और अनूप के बीच भी सुलह हो गई। माया का पुरवा मजरे रसूलपुर निवासी मथुरा प्रसाद ने किसान क्रेडिट कार्ड पर पंजाब नेशनल बैंक से करीब 31 हजार लोन लिया था। बीच में एक दो किस्त जमा किया। इसके बाद लोन अदा नहीं कर पा रहे थे। राष्ट्रीय लोक अदालत पहुंचकर मथुरा ने लोन अदा किया। मथुरा ने बताया कि 11 हजार रुपये जमा कर पूरा लोन चुकता कर दिया। अब जाकर राहत मिली।