मथुरा के रिफाइनरी में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय में दशहरा महोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में बाल कलाकारों की ओर से प्रस्तुत रामलीला आकर्षण का केंद्र रही। कलाकारों ने सीता हरण, मेघनाद वध और भरत मिलाप सहित रामायण के विभिन्न प्रसंगों का सजीव मंचन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के अंत में अहंकार रूपी रावण का दहन कर बुराइयों को त्यागने का संदेश दिया गया। सेवा केंद्र प्रभारी राजयोगिनी बीके कृष्णा दीदी ने दशहरे का आध्यात्मिक महत्व समझाते हुए कहा कि रावण के दस सिर मनुष्य के दस मनोविकारों के प्रतीक हैं। इनमें काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, ईर्ष्या, द्वेष, नफरत, आलस्य और अलबेलेपन जैसे विकार शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन विकारों का समूल नाश आत्मिक ज्ञान रूपी बाण से ही संभव है। दशहरा हमें अपने भीतर की बुराइयों को पहचानकर उन्हें समाप्त करने की प्रेरणा देता है।