संत समागम में शामिल होने आए जूना अखाड़े के संत स्वामी यतींद्रानंद गिरी महाराज ने कहा कि देश के प्रमुख मंदिरों को सरकारों के नियंत्रण से मुक्त किया जाना चाहिए। गुरुद्वारों की तर्ज पर मंदिरों के लिए सनातन बोर्ड बनाया जाना चाहिए। उन्होंने यह बात अमर उजाला से खास बातचीत में कही। यतींद्रानंद गिरी ने कहा कि मंदिरों में हिंदुओं की आस्था से जुड़ा दान आता है। सरकारों के पास इस दान के खर्च का कोई हिसाब-किताब नहीं होता। उनके अनुसार मंदिरों से मिलने वाले धन का उपयोग सनातन धर्म की व्यवस्थाओं को मजबूत करने में किया जाना चाहिए। इससे गुरुकुल, शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में काम किए जा सकते हैं। उन्होंने सरकारों के नियंत्रण वाले मंदिरों के दान के पारदर्शी और उचित उपयोग की व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही। राम मंदिर में चंदा चोरी को बताया व्यवस्थागत चूक स्वामी यतींद्रानंद गिरी ने राम मंदिर में हुई चंदा चोरी की घटना को व्यवस्थागत चूक बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं अन्य धार्मिक स्थलों पर भी होती हैं, लेकिन यह घटना रामजन्मभूमि मंदिर में हुई, इसलिए अधिक चर्चा में आई। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए व्यवस्थाओं में सुधार किया जाना चाहिए। शिक्षा में संस्कार भी जरूरी उन्होंने कहा कि शिक्षा को केवल नौकरी पाने तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। शिक्षा में संस्कारों का समावेश भी जरूरी है। साथ ही उन्होंने शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में सभी को समान अवसर मिलने की वकालत की। गाय की रक्षा जीव जगत की रक्षा गाय की उपयोगिता पर उन्होंने कहा कि वह हाल ही में बठिंडा गए थे। वहां रासायनिक खादों के इस्तेमाल से जमीन की गुणवत्ता प्रभावित होने की बात सामने आई। उनके अनुसार विशेषज्ञों ने जमीन की उर्वरता बनाए रखने के लिए देसी गाय के गोबर से बनी खाद के इस्तेमाल की सलाह दी है। इससे मिट्टी की उर्वरता और उत्पादकता बहाल करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि गाय की रक्षा केवल धार्मिक विषय नहीं है। जीव-जगत और पर्यावरण की रक्षा के लिए भी गाय का संरक्षण आवश्यक है।