अयोध्या में श्रीराम के राजतिलक की तैयारियां चल रही थीं। नगर ध्वज-पताकाओं से सज रहा था और उत्सव का माहौल था। इसी बीच दासी मंथरा की नजर इस आयोजन पर पड़ी और उसने महारानी कैकेयी के मन में भरत के भविष्य को लेकर आशंका पैदा कर दी। मंथरा के बहकावे में आकर कैकेयी कोप भवन पहुंच गईं। यहीं से भगवान श्रीराम के वनवास की भूमिका तैयार होने लगी। शुक्रवार की शाम हरिशंकरी स्थित श्रीराम चबूतरा पर अति प्राचीन श्रीरामलीला कमेटी की ओर से आयोजित रामलीला में इन प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया।