भाई को बंदी बनाए जाने की खबर मिली तो आल्हा ने उसे मुक्त कराने का संकल्प लिया। लोकमान्यता के अनुसार, मैहर की मां शारदा से मार्गदर्शन मिलने के बाद आल्हा अपने मंत्री डेभा तिवारी के साथ बबुरी वन पहुंचे और मां महाकाली की तपस्या की। इसके बाद बब्रुवाहन वंश के राजा से युद्ध कर उसे पराजित किया और भाई ऊदल को मुक्त कराया। आल्हा-ऊदल की वीरता से जुड़ी यह गाथा आज भी बबुरी में लोकगीतों के जरिए सुनाई जाती है। यहां स्थित सिद्धिदात्री मां महाकाली मंदिर के साथ प्राचीन महल और सराय से जुड़ी मान्यताएं भी क्षेत्र के इतिहास को लेकर उत्सुकता बढ़ाती हैं।