ग्रामीणों को अंतिम संस्कार की सुविधा देने और गंगा को प्रदूषण से बचाने के उद्देश्य से करीब 11 साल पहले जिले में तीन शवदाह गृह और अंत्येष्टि स्थलों का निर्माण कराया गया। इन पर सरकारी खजाने से 44.50 लाख रुपये खर्च हुए, लेकिन योजना का उद्देश्य अब तक पूरा नहीं हो सका।