अयोध्या के रुदौली तहसील क्षेत्र में सरयू नदी की कटान ने पटरंगा माझां गांव की तस्वीर बदल दी है। कटान का कहर ऐसा है कि गांव का नामोनिशान तक मिट चुका है और हजारों बीघा धान व गन्ने की फसल नदी में समा गई है। करीब दो महीने से जारी कटान के बीच ग्रामीण अपने घर-गृहस्थी का सामान लेकर खुद ही सुरक्षित स्थानों पर चले गए। ग्रामीण दूधनाथ, शत्रोहन यादव और ननकू का आरोप है कि फसलें नदी में समा गईं, लेकिन अब तक कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा और न ही नुकसान का सर्वे कराया गया। पटरंगा माझां पहुंचना भी आसान नहीं है। पहले महंगू पुरवा से नाव के जरिए सरयू पार करनी पड़ती है और इसके बाद करीब दो किलोमीटर पैदल चलकर गांव तक पहुंचा जा सकता है। ग्रामीणों के मुताबिक जलस्तर बढ़ा होने के कारण नाव से नदी पार करना भी जोखिम भरा है। अमर उजाला की टीम भी महंगू पुरवा से नाव के जरिए पटरंगा माझां पहुंची और करीब दो किलोमीटर पैदल चलकर कटान प्रभावित इलाके का जायजा लिया। ग्रामीणों का कहना है कि सालभर की कमाई का जरिया उनकी फसलें थीं, लेकिन कटान ने सब कुछ छीन लिया। अब परिवार का खर्च कैसे चलेगा, यह चिंता उन्हें सता रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल फसलों के नुकसान का सर्वे कराकर मुआवजा दिलाने की मांग की है। वहीं एसडीएम विनोद गुप्ता ने बताया कि पटरंगा माझां गांव का सर्वे कराया जाएगा और हुए नुकसान का आकलन कराकर नियमानुसार मुआवजा दिलाने की कार्रवाई की जाएगी।