आगरा। दुनिया के अलग-अलग देशों में हिंदी का प्रचार-प्रसार करने की भारत सरकार की योजना के तहत विदेशी विद्यार्थियों को हिंदी सिखाने वाला केंद्रीय हिंदी संस्थान इस बार कम विद्यार्थियों के साथ सत्र शुरू कर रहा है। नौ महीने के अंतरराष्ट्रीय हिंदी शिक्षण पाठ्यक्रम की 150 सीटों के सापेक्ष 111 विद्यार्थियों का चयन किया गया, लेकिन अब तक 70 ने ही प्रवेश लिया है। चयनित विद्यार्थियों में से 41 के प्रवेश नहीं लेने से 39 सीटें खाली हैं। यह पाठ्यक्रम एक अगस्त से 30 अप्रैल तक चलता है। विदेशों में रहने वाले हिंदी सीखने के इच्छुक विद्यार्थियों के आवेदन संबंधित देशों में स्थित भारतीय दूतावासों के माध्यम से आते हैं। चयन के बाद विद्यार्थी आगरा आकर नौ महीने तक हिंदी का अध्ययन करते हैं। संस्थान की वेबसाइट पर भी 2026-27 के लिए विदेशों में हिंदी प्रचार-प्रसार योजना के तहत अंतरराष्ट्रीय हिंदी शिक्षण पाठ्यक्रम का उल्लेख है। इस बार बोत्सवाना, चीन और उज्बेकिस्तान से चयनित विद्यार्थी अभी संस्थान नहीं पहुंचे हैं। इन विद्यार्थियों के नहीं आने से भी इस सत्र में विदेशी विद्यार्थियों की संख्या प्रभावित हुई है। इससे पहले संस्थान में अलग-अलग देशों से विद्यार्थी लगातार हिंदी सीखने के लिए आते रहे हैं। चार स्तरों में होती है हिंदी की पढ़ाई - विदेशी विद्यार्थियों को हिंदी सीखने के लिए अलग-अलग स्तर के पाठ्यक्रम कराए जाते हैं। इनमें हिंदी भाषा दक्षता प्रमाणपत्र कक्षा-100, हिंदी भाषा दक्षता डिप्लोमा कक्षा-200, हिंदी भाषा दक्षता उच्च डिप्लोमा कक्षा-300 और स्नातकोत्तर हिंदी डिप्लोमा कक्षा-400 शामिल हैं। पाठ्यक्रम में हिंदी भाषा के साथ भारतीय साहित्य, संस्कृति और सामाजिक जीवन की जानकारी भी दी जाती है। हॉस्टल में जगह कम, इसलिए सीमित किया चयन - केंद्रीय हिंदी संस्थान के रजिस्ट्रार डॉ. जोगेंद्र मीणा ने बताया कि इस बार विद्यार्थियों का चयन सीमित रखा गया है। हॉस्टल में जगह की कमी के कारण अधिक विद्यार्थियों को प्रवेश देना संभव नहीं है। उपलब्ध संसाधनों और हॉस्टल की क्षमता के अनुसार ही विद्यार्थियों का चयन किया गया है।