कानून अंधा होता है ये तो हम सभी ने किताबों में पढ़ा है लेकिन सिस्टम बहरा होता है यह शुक्रवार रात को आगरा के एनएन मेडिकल कॉलेज ने साबित कर दिया। यहां इलाज के लिए आई एक प्रसूता को दो विभाग इधर-से उधर टरकाते रहे। तीन घंटे तक वह जिंदगी के लिए छटपटाती रही लेकिन जिम्मेदारों को उस पर तरस नहीं आया। पुलिस-मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत के बाद जब उसे भर्ती किया गया तब तक देर हो चुकी थी। भर्ती होने के कुछ घंटों बाद प्रसूता जिंदगी की जंग हार गई। तांतपुर निवासी गौरव ने बताया कि शुक्रवार शाम को पड़ोसी से झगड़ा होने पर उनकी साली विजय कुमारी (22) के पेट में कोहनी लग गई। इस पर निजी अस्पताल में भर्ती कराया। यहां गर्भ में शिशु मरा हुआ बताकर ऑपरेशन कर दिया। हालत खराब होने पर एसएन इमरजेंसी के लिए रेफर कर दिया। शुक्रवार शाम करीब सात बजे प्रसूता को परिजन एंबुलेंस से इमरजेंसी लेकर पहुंचे। यहां स्टाफ ने कहा कि ये हमारा मामला नहीं है, अंदर स्त्री रोग विभाग लेकर जाओ। वहां पहुंचने पर स्टाफ ने कह दिया कि इसकी हालत खराब है, इमरजेंसी में ही भर्ती कराओ। उनको बताया कि वहीं से ही आए हैं इसके बाद भी स्त्री रोग विभाग के जिम्मेदारों ने भर्ती नहीं किया। मजबूरन फिर से इमरजेंसी पहुंचकर गुहार लगाई लेकिन जिम्मेदारों के दिल नहीं पसीजे। एक परिचित को बुलाया तो उन्होंने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की। 112 नंबर पर पुलिस को भी फोन कर दिया। इधर प्रसूता की सांस भी उखड़ने लगी। हालत बिगड़ने पर करीब 10 बजे इमरजेंसी में भर्ती किया गया। देर रात करीब तीन बजे विजय कुमारी की मौत हो गई। मृतका के पति लाखन ने बताया कि पत्नी की हालत लगातार खराब हो रही थी, भर्ती कराने के लिए दो विभागों के चक्कर लगाते रहे। समय पर इलाज मिल जाता तो जान बच जाती। अब मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है।