आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में हॉस्टल और लेक्चर रूम की कमी है। नए सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया भी चल रही है। इससे छात्रों को परेशानी झेलनी पड़ेगी। पढ़ाई-लिखाई भी प्रभावित होगी। एसएन में स्नातक में 200 और परास्नातक में 213 सीटें हैं। एमबीबीएस पांच साल की हैं और एक बार में एक हजार छात्र-छात्राएं हैं। परास्नातक तीन साल का पाठ्यक्रम है, जिसमें पढ़ने वालों विद्यार्थियों की संख्या 639 है। ऐसे में एसएन में कुल 1639 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इनके लिए लेक्चर रूम चार हैं। इनमें 700-800 छात्रों के बैठने के लिए ही सुविधा है। हॉस्टल की बात करें तो अधिकांश जर्जर भवन तोड़े जा चुके हैं। बचे हुए हॉस्टलों में भी 700-800 छात्रों के ठहरने की व्यवस्था है। ये बीते कई सालों से व्यवस्था है, जब यहां स्नातक की 128 और परास्नातक की करीब 30 सीटें हुआ करती थीं। सीटें बढ़ने के साथ हॉस्टल और लेक्चर रूम नहीं बढ़ाए गए। जबकि इंटीग्रेटेड प्लान के तहत पुराने जर्जर हॉस्टल तोड़े जा चुके हैं। गर्ल्स हॉस्टल में ओपीडी संचालित हो रही है। पुस्तकालय में 300 छात्रों के बैठने की सुविधा है। इससे विद्यार्थियों को पुस्तकालय में भी सीमित संख्या से जूझना पड़ेगा। प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता का कहना है कि करीब दो हजार छात्रों की क्षमता के आधार पर एकेडमिक ब्लॉक, हॉस्टल और पुस्तकालय का निर्माण हो रहा है। सालभर में ये तैयार हो जाएंगे। तब तक वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है।