जीएसटी चोरी का बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। बिना ईवे बिल के आगरा से अलीगढ़ माल ले जा रहे ट्रक को टीम ने पकड़ा। जांच में बिल और बिल्टी फर्जी थी। झारखंड के प्रपत्र दिखाकर टीम को गुमराह किया गया। फर्जी तरीके से खरीद-फरोख्त दर्शाया गया। मामले में तीन फर्म सहित 5 के खिलाफ थाना नाई की मंडी में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। सहायक आयुक्त, राज्य कर सचल दल वीरेंद्र लाल ने डीसीपी सिटी से शिकायत की। उन्होंने बताया कि 18 अगस्त की रात 11:35 बजे एक ट्रक को रामबाग चाैराहे पर रोका। इसमें 12 मीट्रिक टन स्क्रैप लदा था। चालक हाथरस निवासी सलमान ने झारखंड की फर्जी बिल्टी दिखा अधिकारियों को गुमराह करने की कोशिश की। गाजियाबाद की तनिष्क ट्रांसपोर्ट कंपनी ने माल बुक कराया था। माल का परिवहन दुमका से अलीगढ़ दर्शाया गया। झारखंड की जय माता दी ट्रेडर्स की ओर से अलीगढ़ की बालाजी एंटरप्राइजेज फर्म को जारी इनवाॅइस दिखाई। जांच में चालक ने शपथ दिया कि वह माल को आगरा से अलीगढ़ ले जा रहा था। इस माल के लिए ईवे बिल जारी नहीं किया गया था जबकि 50 हजार से अधिक कीमत पर ईवे बिल जारी करना अनिवार्य है। इसके साथ ही माल आगरा से लोड हुआ जबकि अन्य जगह से माल की लोडिंग के दस्तावेज दिखाए गए। माल की कीमत 216383 दिखाई गई। इसके बावजूद ईवे बिल जारी नहीं किया। झारखंड से टैक्स इनवाॅइस से अधिकारियों को भ्रमित करना चाहते थे। वाहन के मूवमेंट की जांच में पता चला कि वाहन 2 जून को बरोस टोल प्लाजा से निकला। यह झारखंड कभी नहीं गया। विभाग ने जय माता ट्रेडर्स की जीएसटी प्रोफाइल खंगाली। जांच में पता चला कि फर्म ने जीएसटी का पंजीयन 27 दिसंबर 2025 को लिया। वित्तीय वर्ष 2025-26 और 2026-27 में जीएसटीआर-2ए खरीद शून्य दिखी। उसके पास स्टाॅक भी नहीं था। जीएसटीआर-1 में भी मई 2026 में 5378 रुपये और जून 2026 में 7825 रुपये कुल 13203 रुपये की बिक्री दिखाई गई। 1.83 लाख रुपये के 12 टन स्क्रैप की बिक्री का इनवाॅइस जारी करना चोरी की मंशा को दर्शाता है। फर्मों से भी माल खरीद की पुष्टि नहीं हो सकी। क्रेता बालाजी एंटरप्राइजेज ऐसी फर्म से खरीद करते मिली कि जो कि निरस्त थी या फिर निलंबित कर दी गई थीं।