आगरा के कलेक्ट्रेट परिसर की जमीन पर कब्जे के आरोप में घिरा अंजुमन मोहम्मदिया ट्रस्ट सोमवार को अपर जिलाधिकारी तृतीय की कोर्ट में अपना जवाब दाखिल करेगा। कोर्ट ट्रस्ट के जवाब और तथ्यों का अध्ययन कर उसके भविष्य पर फैसला करेगा। ट्रस्ट के सहायक सचिव ने दावा किया है कि यह जमीन कानूनी प्रक्रिया के तहत मिली थी। उसने कोई अवैध कब्जा नहीं किया है, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से दी गई जमीन पर नियमानुसार काबिज हैं। 1997 में तत्कालीन जिलाधिकारी दुर्गा शंकर मिश्र के साथ समझौते के बाद गाटा पर कब्जा और चौहद्दी स्पष्ट हो गई थी। दस्तावेज में यह जमीन जमीदारी की है, नजूल की नहीं, और यह जानकारी तहसील के रिकॉर्ड में दर्ज है। समझौते के बाद से साल 2003 तक कलेक्ट्रेट प्रशासन ही 314 रुपये प्रति साल का किराया देता रहा। वर्तमान में इस जमीन पर ट्रस्ट की ओर से बालिका और बालकों के लिए दो स्कूल संचालित हैं, जिससे बच्चों के भविष्य पर भी संकट है। प्रशासन का दावा है कि कलेक्ट्रेट दस्तावेज में लगभग 30 हजार वर्गमीटर जमीन दर्ज है लेकिन मौके पर करीब 20 हजार वर्गमीटर पर ही कब्जा है। जिलाधिकारी मनीष बंसल के निर्देश के बाद प्रशासनिक अमला रिकॉर्ड के आधार पर पूरी जमीन पर कब्जा लेने की तैयारी में है।