विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता का मुद्दा अब हिमाचल प्रदेश में जोर पकड़ने लगा है। प्रदेश के विश्वविद्यालयों की अकादमिक और प्रशासनिक स्वतंत्रता बहाल करने की मांग को लेकर वीरवार को हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) के सभागार में शिक्षकों और पूर्व छात्रों ने आवाज बुलंद की। सुबह 11:30 बजे आयोजित रोष सभा में प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से जुड़े शिक्षक और पूर्व छात्र शामिल हुए। सभा में सरकार से विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता बहाल करने की मांग उठाई गई। सभा में शामिल शिक्षकों और पूर्व छात्रों ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्रियां देने वाले संस्थान नहीं हैं, बल्कि शिक्षा, शोध और नए विचारों के विकास के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। यहां शैक्षणिक निर्णय लेने, शोध कार्यों को आगे बढ़ाने और अकादमिक गतिविधियों के संचालन में स्वतंत्रता की अहम भूमिका होती है। वक्ताओं का कहना था कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता प्रभावित होने से उनकी शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर असर पड़ सकता है। इसलिए प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों को स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर मिलना चाहिए। रोष सभा में इस मुद्दे को केवल विश्वविद्यालय परिसरों तक सीमित न रखते हुए आम समाज तक पहुंचाने पर भी जोर दिया गया। आयोजकों ने शिक्षकों, पूर्व छात्रों और समाज के विभिन्न वर्गों से विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता के समर्थन में एकजुट होने की अपील की। सभा के आयोजक डॉ. नितिन व्यास ने मीडिया से भी इस विषय को प्रमुखता से उठाने और सहयोग करने का आग्रह किया। उनका उद्देश्य विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता से जुड़े सवालों को व्यापक चर्चा का हिस्सा बनाना है। सभा में उठी मांग के केंद्र में विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक स्वतंत्रता और उनके निर्णय लेने के अधिकार रहे। शिक्षकों और पूर्व छात्रों का मानना है कि विश्वविद्यालयों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शोध के लिए ऐसा वातावरण मिलना चाहिए, जहां अकादमिक फैसले स्वतंत्र रूप से लिए जा सकें। अब देखना होगा कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता बहाल करने की इस मांग पर प्रदेश सरकार क्या रुख अपनाती है।