नगर निगम चुनाव से पहले नाम वापसी के बाद अब द्वेष और आपसी खींचतान सामने आने लगी है। ताजा मामला शहर के वार्ड नंबर 49 से सामने आया है, जहां भाजपा से बागी हुए एक निर्दलीय प्रत्याशी के स्कूल को अचानक सीज करने के लिए नगर निगम की टीम पहुंच गई। कार्रवाई के दौरान स्कूल के अंदर बच्चे और पूरा स्टाफ मौजूद था। टीम की अचानक हुई कार्रवाई से स्थानीय लोग नाराज हो गए और भाजपा पर राजनीतिक द्वेष निकालने का आरोप लगाया। हालांकि, लोगों की नाराजगी और विरोध के बीच नगर निगम की टीम कार्रवाई किए बिना बैरंग लौट गई। यहां से निर्दलीय प्रत्याशी कौशल किशोर ने पहले भाजपा से टिकट मांगा था, लेकिन टिकट नहीं मिलने पर वे निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।
स्कूल पर कार्रवाई से बढ़ा विवाद
भाजपा से बागी और निर्दलीय प्रत्याशी कौशल किशोर ने बताया कि वह काफी समय से भाजपा में कर्मठ कार्यकर्ता के रूप में काम कर रहे हैं। लेकिन नगर निगम चुनाव में उन्हें दरकिनार कर दूसरे कार्यकर्ता को टिकट दे दिया गया। इसका विरोध करते हुए वे निर्दलीय चुनाव लड़ने के लिए मैदान में खड़े हुए। उनका आरोप है कि भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में उन्हें नाम वापस लेने के लिए धमकाया गया और दबाव बनाया गया। लेकिन उन्होंने नाम वापस नहीं लिया। निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव चिह्न भी मिल गया है और कौशल किशोर ने प्रचार भी शुरू कर दिया है।
‘पार्टी को वोट कटने का डर, पुलिस का भी बनाया दबाव’
कौशल किशोर का कहना है कि भाजपा को इस वार्ड से काफी वोट कटने की उम्मीद है, इसलिए पार्टी की तरफ से लगातार दबाव बनाया जा रहा है। उनके अनुसार, इसके लिए पुलिस का दबाव भी बनाया गया, लेकिन वह डरे नहीं और मैदान में डटे हुए हैं।
पत्नी के तबादले और स्कूल बंद कराने की धमकी का आरोप
कौशल किशोर का यह भी कहना है कि जब उन्होंने नाम वापस नहीं लिया तो उन्हें और उनके परिवार को डराया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी का तबादला जैसलमेर जैसी जगह करने और स्कूल को बंद करवाने की धमकी लगातार दी जा रही थी। उनका कहना है कि उन्होंने नाम वापस लेने का मन भी बना लिया था, लेकिन उससे पहले ही स्कूल को बंद करने के लिए नगर निगम की टीम आ गई। ऐसे में अब उन्होंने नाम वापस लेने से इनकार कर दिया है।
'फायर सेफ्टी की शिकायत पर जांच करने पहुंची थी टीम'
वहीं, नगर निगम के सीएफओ राकेश व्यास ने बताया कि उन्हें 2-3 दिन पहले स्कूल की शिकायत मिली थी कि वहां फायर सेफ्टी उपकरण नहीं हैं। इसके बाद जांच के लिए टीम भेजी गई थी। सीएफओ के अनुसार, स्कूल में फायर सेफ्टी उपकरण और एनओसी नहीं मिली। ऐसे में नोटिस जारी किया गया, लेकिन नोटिस किसी ने लिया नहीं।