मानसा में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले युवा एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की हत्या के विरोध में पंजाब बंद के आह्वान पर बुधवार को जगरांव के बस स्टैंड चौक में विभिन्न किसान संगठनों, राजनीतिक दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने धरना देकर पंजाब सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। धरने में गांव चकर की महज 16 वर्षीय लड़की सरप्रीत कौर ने कहा कि परविंदर सिंह झोटा की हत्या केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश के तहत पंजाब के भविष्य का कत्ल है। उसने कहा कि आज उसे अपना भविष्य भी अंधकार में दिखाई दे रहा है। नशे ने घर-घर में अपने पैर पसार लिए हैं और इसके लिए सरकार को अपनी जिम्मेदारी से भागना नहीं चाहिए। सरप्रीत कौर ने कहा कि पंजाब की नौजवानी नशे के कारण बर्बादी के कगार पर खड़ी है। आए दिन युवाओं की मौत की खबरें सामने आती हैं, लेकिन कई मामलों में मौत के कारणों को लेकर सवाल उठते हैं। उसने आरोप लगाया कि नशे से होने वाली मौतों को हार्ट अटैक बताकर मामलों को रफा-दफा कर दिया जाता है। गलत सरकारों को चुनने में जनता की भी जिम्मेदारी है। चुनावों के दौरान लोग शराब, पैसे और दूसरे लालच में आकर वोट तो दे देते हैं, लेकिन यह नहीं सोचते कि उनके फैसले का आने वाली पीढ़ियों पर क्या असर पड़ेगा। कांग्रेस के पूर्व विधायक जगतार सिंह जग्गा ने कहा कि पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों को कथित तौर पर पुलिस के डंडे के जोर पर चुप करवाने की कोशिश की जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग दबाव के आगे झुकने से इनकार करते हैं, उनके खिलाफ किसी न किसी बहाने से मामले दर्ज कर दिए जाते हैं। किसान जत्थेबंदियों के नेताओं ने कहा कि नशा बेचने वाले दुकानदार और छोटे स्तर के विक्रेता ही पूरे नेटवर्क का चेहरा नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नशे के कारोबार को संरक्षण देने वालों में कथित तौर पर पुलिस, संबंधित विभागों के अधिकारियों और राजनीतिक लोगों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इस मौके पर भारतीय किसान यूनियन डकौंदा, भारतीय किसान यूनियन उगराहां, कीर्ति किसान यूनियन, मजदूर संगठनों, इंकलाबी केंद्र पंजाब और विभिन्न समाजसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों के अलावा कांग्रेस के पूर्व विधायक जगतार सिंह जग्गा, शिरोमणि अकाली दल के एसआर कलेर तथा भाजपा के डॉ. राजिंदर शर्मा सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। धरने में आम आदमी पार्टी को छोड़कर विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने नशे के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ उठ रही आवाज को और मुखर किया।