जिले के गांव कोठे धालीवाल, कोठे बेर वाले और आसपास के इलाकों में दो दिन पहले हुई भारी बारिश और ओलावृष्टि से खेतों में खड़ी धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। फसल बर्बाद होने से प्रभावित किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों ने प्रशासन से तुरंत विशेष गिरदावरी करवाकर नुकसान का आकलन करने और सरकार से 50 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने की मांग की है। प्रभावित किसान कुलवंत सिंह, गुरांदित्ता सिंह सहित अन्य किसानों ने बताया कि ओलावृष्टि ने उनकी छह महीने की मेहनत पर पानी फेर दिया है। किसानों के अनुसार, धान की फसल को हुए नुकसान के कारण उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। खासकर ठेके पर जमीन लेकर खेती करने वाले किसानों के लिए स्थिति अधिक मुश्किल हो गई है, क्योंकि उन्हें फसल पर किए गए खर्चों की भरपाई करने के साथ-साथ जमीन का ठेका भी चुकाना है। किसानों ने आरोप लगाया कि घटना के दो दिन बीत जाने के बावजूद प्रशासन का कोई अधिकारी खेतों में पहुंचकर नुकसान का जायजा लेने नहीं आया। इससे प्रभावित किसानों में रोष पाया जा रहा है। किसानों का कहना है कि समय पर नुकसान का आकलन नहीं होने से उन्हें राहत मिलने में देरी हो सकती है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि प्रभावित गांवों में तुरंत विशेष गिरदावरी करवाई जाए, ताकि फसल के नुकसान का सही आकलन हो सके। किसानों ने सरकार से 50 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा देने की अपील करते हुए कहा कि इससे उन्हें आर्थिक संकट से उबरने और आगामी रबी की फसल की बिजाई की तैयारी करने में मदद मिलेगी। किसानों ने सरकार और प्रशासन से अपील की कि प्रभावित किसानों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए बिना देरी किए राहत देने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि उन्हें हुए आर्थिक नुकसान की कुछ हद तक भरपाई हो सके।