शहीदों की धरती श्री चमकौर साहिब में दशहरे का पर्व हर वर्ष की तरह इस बार भी सिख परंपराओं के अनुसार ‘दरबार-ए-खालसा’ के रूप में मनाया गया। सिख धर्म के अनुयायी सदियों से चली आ रही धार्मिक मर्यादाओं के अनुसार यह दिन सिख क़ौम तख्त श्री हजूर साहिब और श्री चमकौर साहिब में श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाती हैं। इस अवसर पर श्री चमकौर साहिब में धार्मिक समागम आयोजित किए गए। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की ओर से नगर कीर्तन सजाया गया, जबकि गुरु की लाडली फौज के रूप में पहचाने जाने वाले निहंग सिंहों ने अपने पारंपरिक युद्ध कौशल का प्रदर्शन करते हुए मोहल्ला निकाला। इस दिन सजाए गए दीवान में सिख धर्म से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। वहीं, निहंग सिंहों के अनुसार, इस पर्व को सिखों के सिरों पर इनाम घोषित करने वाले मीर मन्नू को दंडित किए जाने की खुशी में मनाने की परंपरा से भी जोड़ा जाता है। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गुरुद्वारा कतलगढ़ साहिब सहित विभिन्न गुरुद्वारों में माथा टेका। गुरुद्वारा कतलगढ़ साहिब में संगत की भारी भीड़ देखने को मिली। दूसरी ओर, घोड़ों पर सवार होकर खेल स्टेडियम पहुंचे निहंग सिंहों ने घुड़सवारी, नेजबाजी और गतका के हैरतअंगेज करतब दिखाए। इन प्रदर्शनों को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।